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ED Raid: भारतमाला प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण मुआवजे की अनियमितताओं पर कार्रवाई 

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 नई दिल्ली/रायपुर, 29 दिसंबर 2025। ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 29 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह एक्शन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के भुगतान में कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़ा है।

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सूत्रों के अनुसार, ईडी की टीमों ने राज्य की राजधानी रायपुर और पड़ोसी जिले महासमुंद में कम से कम नौ ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। इनमें कारोबारी हरमीत सिंह खनूजा, उनके कथित सहयोगियों, कुछ सरकारी अधिकारियों और जमीन मालिकों से जुड़े परिसर शामिल हैं। यह मामला पहले से ही विवादों में रहा है। छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट के भूमि अधिग्रहण में करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लगे हैं।

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पहले राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अप्रैल 2025 में 20 से अधिक स्थानों पर छापे मारे थे, जिसमें राजस्व अधिकारियों और मध्यस्थों की मिलीभगत से जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर मुआवजा राशि बढ़ाने के सबूत मिले। जांच में पाया गया कि एक ही जमीन को कई हिस्सों में बांटकर और फर्जी दस्तावेज बनाकर मुआवजा दोगुना या उससे अधिक वसूला गया।

कुछ रिपोर्ट्स में घोटाले की राशि 43 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि विपक्ष ने इसे 350 करोड़ तक का अनुमान लगाया है। इस प्रकरण में पहले ही कुछ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिसमें दंपति और मध्यस्थ शामिल हैं। ईडी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से की जा रही है, जहां अवैध रूप से प्राप्त मुआवजे को अन्य खातों में ट्रांसफर करने और संपत्ति बनाने के आरोप जांच के दायरे में हैं।

अधिकारियों का कहना है कि छापों में महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड जब्त किए जा रहे हैं। यह जांच राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की शिकायतों पर आधारित है, जिसमें भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आई थी। भारतमाला परियोजना क्या है
भारतमाला परियोजना भारत सरकार की एक प्रमुख सड़क विकास योजना है, जिसकी शुरुआत 2017 में हुई। इसका उद्देश्य देश में माल ढुलाई और यात्री आवागमन की दक्षता बढ़ाना है।

फेज-1 में लगभग 34,800 किलोमीटर सड़कों का विकास प्रस्तावित है, जिसमें 26,000 किलोमीटर आर्थिक गलियारे शामिल हैं। ये गलियारे गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर के साथ जुड़कर देश के अधिकांश माल यातायात को संभालेंगे। रायपुर-विशाखापत्तनम कॉरिडोर इसी का हिस्सा है, जो छत्तीसगढ़ में 124 किलोमीटर और कुल 463 किलोमीटर लंबा है। यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों, तटीय इलाकों और बंदरगाहों की कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स पार्क और एक्सप्रेसवे विकसित करने पर जोर देती है।

अनुमान है कि इससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बल मिलेगा, लेकिन भूमि अधिग्रहण में अनियमितताएं परियोजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही हैं। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार पर केंद्र सरकार की सख्ती को दर्शाती है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक बताकर सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।

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