लखनऊ, 27 सितंबर 2025। UP SIR: उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी हो गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य की मतदाता सूची से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने तय हो गए हैं, जो कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं का लगभग 18.7% है। इनमें से अधिकांश नाम मृतक, स्थायी रूप से स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अनुपस्थित मतदाताओं के हैं।
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सबसे ज्यादा नाम लखनऊ और गाजियाबाद जिलों से कटे हैं, जहां कुल कटौती का करीब 30% हिस्सा है। SIR प्रक्रिया के दौरान पिछले 14 दिनों में केवल करीब 2 लाख नए नाम ही जोड़े जा सके, जो इसकी सख्ती को दिखाता है। आंकड़ों के मुताबिक, कटे नामों में- 1.26 करोड़ स्थायी रूप से बाहर शिफ्ट हो चुके, जिनमें 46 लाख मृतक, 23 लाख डुप्लीकेट, 84 लाख अनुपस्थित या अनट्रेसेबल और 9.37 लाख ने फॉर्म जमा नहीं किए।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि अब कोई एक्सटेंशन नहीं मिलेगा और 31 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी। दावे-आपत्तियां 30 जनवरी 2026 तक दर्ज की जा सकेंगी, जबकि अंतिम सूची 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।
अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर तीखा हमला बोला। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि यूपी बीजेपी में चल रहा घमासान असल में SIR से 2.89 करोड़ नाम कटने की वजह से है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के मुताबिक इनमें 85-90% बीजेपी के अपने वोटर हैं। गणितीय विश्लेषण में अखिलेश ने कहा, “2.89 करोड़ का 85% यानी करीब 2.46 करोड़। इसे 403 विधानसभा सीटों से भाग दें तो प्रति सीट लगभग 61,000 वोट कम होंगे।
ऐसे में बीजेपी हर सीट पर आनुपातिक रूप से 61 हजार वोट गंवाएगी। सरकार क्या बनाएगी, दहाई का अंक भी पार नहीं कर पाएगी। “उन्होंने ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी में आपसी लड़ाई इसलिए है क्योंकि संगठन और सरकार किसी की नहीं सुन रही।
विधायक सर्वे में फेल होने के डर से सफाई देने में जुटे हैं। अंत में उन्होंने कहा, “भाजपाई SIR ने खुद खोदा गड्ढा और भाजपा को गिरा दिया। अब PDA सरकार बनाएगी, भाजपा का पीड़ा-राज मिटाएगी।” यह प्रक्रिया मतदाता सूची को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से की गई है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक साजिश बता रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जरूरी कदम है।
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