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QR Code Scam: साउथ की फिल्म से लिया आइडिया, QR कोड एडिट कर की लाखों की ठगी, ऐसे आया गिरफ्त में

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QR Code Scam

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नई दिल्ली, 26 दिसंबर 2025। QR Code Scam: दिल्ली पुलिस की नॉर्थ जिले की साइबर सेल ने एक अनोखे साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए राजस्थान के जयपुर निवासी 19 वर्षीय मनीष वर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने दक्षिण भारतीय फिल्म ‘वेट्टैयां’ (Vettaiyan) के एक सीन से प्रेरणा लेकर दुकानों के मूल QR कोड को AI आधारित इमेज एडिटिंग टूल्स से छेड़छाड़ कर अपना बैंक अकाउंट लिंक कर दिया था।

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इससे ग्राहकों के पेमेंट सीधे उसके खाते में ट्रांसफर हो जाते थे, जबकि दुकानदारों को पता तक नहीं चलता था। पुलिस ने आरोपी के पास से 100 से अधिक एडिटेड QR कोड, चैट्स, स्क्रीनशॉट और फाइनेंशियल रिकॉर्ड बरामद किए हैं, जिससे कई अन्य पीड़ितों की पहचान होने की उम्मीद है। मामला 13 दिसंबर का है, जब एक ग्राहक चांदनी चौक की मशहूर कपड़ा दुकान पर 2.50 लाख रुपये का लहंगा खरीदने गया।

ट्रांजेक्शन के लिए दुकान पर लगे QR कोड को स्कैन कर उसने दो बार पेमेंट किया,पहले 90,000 रुपये और फिर 50,000 रुपये। कुल 1.40 लाख रुपये का पेमेंट सफल दिखाया गया, लेकिन दुकान के मालिक ने कहा कि उनके ऑफिशियल अकाउंट में कोई राशि क्रेडिट नहीं हुई। ग्राहक ने पेमेंट के स्क्रीनशॉट दिखाए, फिर भी दुकानदार ने इनकार किया। ठगे जाने का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर पुलिस में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।

डीसीपी (नॉर्थ) राजा बांठिया के अनुसार, यह इंटर-स्टेट ऑपरेशन का नतीजा था। एसीपी विदुषी कौशिक की देखरेख में एसएचओ राजेश कुमार, हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र, मोहित और टीम ने जांच शुरू की। दुकान का स्पॉट इंस्पेक्शन किया गया, बिलिंग प्रोसेस और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को वेरिफाई किया। सबसे अहम था UPI ट्रांजेक्शन ट्रेल का डिटेल्ड एनालिसिस, जिससे पता चला कि QR कोड में छेड़छाड़ की गई थी और राशि राजस्थान के एक बैंक अकाउंट में गई।

तकनीकी जांच और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर आरोपी तक पहुंचा गया और जयपुर के चाकसू इलाके से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में मनीष वर्मा ने कबूल किया कि QR कोड से ठगी का आइडिया उसे राजिनीकांत स्टारर तमिल फिल्म ‘वेट्टैयां’ के एक सीन से मिला, जिसमें साइबर क्राइम के जरिए फाइनेंशियल फ्रॉड दिखाया गया है।

आरोपी ने इंटरनेट से दुकानों की पहचान की, उनसे मूल QR कोड मंगवाए (जैसे प्रोडक्ट में इंटरेस्ट दिखाकर) और फिर AI टूल्स से बैंक डिटेल्स बदल दीं। एडिटेड QR कोड बाहर से बिल्कुल मूल जैसे दिखते थे, लेकिन स्कैन करने पर पैसे उसके अकाउंट में जाते थे। वह बेरोजगार था और क्लास 10 के बाद पढ़ाई छोड़ चुका था।

आरोपी के बैंक अकाउंट और मोबाइल की जांच से ठगी की राशि की पुष्टि हुई। बरामद डिजिटल सबूतों से साफ है कि उसने सिस्टेमैटिक तरीके से कई मर्चेंट्स को टारगेट किया था। पुलिस का कहना है कि यह फ्रॉड डिजिटल पेमेंट्स की कमजोरियों को उजागर करता है। व्यापारियों को सलाह दी गई है कि QR कोड को लाइव और डायनामिक रखें, गैलरी से सेव्ड इमेज न इस्तेमाल करें और हर ट्रांजेक्शन के बाद अकाउंट चेक करें। जांच जारी है और अन्य पीड़ितों व ट्रांजेक्शंस की तलाश की जा रही है।

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