Home » देश » Delhi Pollution: दिल्ली-NCR में सांसों पर संकट बरकरार, AQI 400 के पार, SC 17 दिसंबर को करेगा सुनवाई

Delhi Pollution: दिल्ली-NCR में सांसों पर संकट बरकरार, AQI 400 के पार, SC 17 दिसंबर को करेगा सुनवाई

Share :

Delhi Pollution

Share :

नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025। Delhi Pollution: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार गंभीर बना हुआ है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सक्रिय रुख अपनाते हुए याचिका पर 17 दिसंबर को विस्तृत सुनवाई करने का फैसला किया है।

इसे भी पढ़ें- Delhi Pollution: दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर SC ने केंद्र और राज्यों को लगाई फटकार, एक हफ्ते में सौंपें एक्शन प्लान रिपोर्ट

सोमवार (15 दिसंबर 2025) को मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पांचोली के साथ ने इस मामले पर विचार किया। न्याय मित्र (अमीकस क्यूरी) के रूप में अदालत की सहायता कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने मौजूदा उपायों के खराब कार्यान्वयन पर गहरी चिंता जताई।

Delhi Pollution

अपराजिता सिंह ने पीठ के समक्ष कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी जरूरी प्रोटोकॉल और उपाय पहले से मौजूद हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा इनका प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया जा रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट निर्देश नहीं देता, संबंधित अधिकारी सक्रिय नहीं होते। सिंह ने बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे भी उठाए। अदालत के पिछले आदेशों के बावजूद कई स्कूलों में बाहरी खेल गतिविधियां और स्पोर्ट्स इवेंट आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दिसंबर-जनवरी में ऐसे आयोजनों पर रोक के बावजूद स्कूल तरीके निकालकर इनका आयोजन कर रहे हैं, जो बच्चों को जहरीली हवा के संपर्क में डाल रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) भी बार-बार अदालत के आदेशों का हवाला दे रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हो रहा।सीजेआई सूर्यकांत ने इन दलीलों पर गौर करते हुए कहा कि अदालत समस्या से पूरी तरह वाकिफ है और ऐसे व्यावहारिक तथा लागू करने योग्य आदेश पारित करेगी जिनका पालन सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने टिप्पणी की कि कुछ निर्देशों को बलपूर्वक लागू किया जा सकता है, लेकिन महानगरों में लोगों की अपनी जीवनशैली होती है, जिसे बदलना मुश्किल है। हालांकि, गरीबों और मजदूरों का क्या होगा? अपराजिता सिंह ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) के सख्त प्रावधानों, जैसे निर्माण कार्यों पर रोक, से सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब दिहाड़ी मजदूर होते हैं, जिनकी रोजी-रोटी छिन जाती है।

इससे पहले अदालत ने स्पष्ट किया था कि वायु प्रदूषण की याचिका को केवल सर्दियों का ‘रूटीन’ मामला नहीं माना जा सकता। अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधानों के लिए महीने में दो बार सुनवाई की जाएगी। सोमवार को दिल्ली घने स्मॉग की चादर में लिपटी रही, जहांगीरपुरी जैसे क्षेत्रों में एक्यूआई 498 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में है।

कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण स्तर बेहद खराब दर्ज किया गया, जिससे दृश्यता प्रभावित हुई और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गए।यह मामला लंबे समय से चल रहा है और अदालत प्रदूषण के स्रोतों—like वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल, पराली जलाना—पर सख्त कदम उठाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 17 दिसंबर की सुनवाई में प्रभावी निर्देशों की उम्मीद है, जो न केवल प्रदूषण कम करें बल्कि गरीब वर्ग पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखें।

इसे भी पढ़ें- Delhi Pollution: दिल्ली-NCR की हवा बेहद खराब, बवाना में AQI 400 पार, जानें अपने इलाके की स्थिति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
News Portal Development Services in Uttar Pradesh
Cricket Score
सबसे ज्यादा पड़ गई
Share Market

शहर चुनें

Follow Us