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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल संसद में पेश
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UGC, AICTE और NCTE की जगह लेगा नया सिंगल रेगुलेटर
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बदल जाएगा उच्च शिक्षा का पूरा ढांचा!
नई दिल्ली, 15 दिसंबर 2025। Viksit Bharat Shiksha Bill 2025: भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। 15 दिसंबर 2025 को संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025’ पेश किया। यह विधेयक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की प्रमुख सिफारिशों को लागू करने का माध्यम बनेगा, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा को अधिक स्वायत्त, पारदर्शी और वैश्विक स्तर का बनाना है।
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पहले हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बिल के नाम से जाना जाने वाला यह विधेयक अब ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान’ के रूप में सामने आया है, जो ‘विकसित भारत @2047’ के विजन से जुड़ा हुआ है। इस बिल का मुख्य प्रस्ताव है कि मौजूदा यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) को समाप्त कर एक सिंगल अंब्रेला बॉडी की स्थापना की जाए।
इस नए आयोग में तीन विशेषीकृत काउंसिल होंगी। रेगुलेटरी काउंसिल (नियमन), एक्रेडिटेशन काउंसिल (गुणवत्ता मूल्यांकन) और स्टैंडर्ड्स काउंसिल (मानक निर्धारण)। यह 12 सदस्यीय कमीशन उच्च शिक्षा संस्थानों को ग्रेडेड ऑटोनॉमी प्रदान करेगा, जिससे वे स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें। साथ ही, आउटकम-बेस्ड एक्रेडिटेशन लागू होगा, जो संस्थानों की गुणवत्ता को परिणामों के आधार पर मापेगा।
बिल में कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। संस्थानों को अपनी वित्तीय जानकारी, ऑडिट, इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और कोर्सेस की पूरी डिटेल्स सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन उपलब्ध करानी होंगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लग सकता है, जो 30 लाख रुपये तक हो सकता है। विदेशी यूनिवर्सिटी भारत में कैंपस खोल सकेंगी, लेकिन सख्त शर्तों के साथ। वहीं, भारतीय संस्थान विदेश में कैंपस स्थापित कर सकेंगे।
मेडिकल और लॉ एजुकेशन इस दायरे से बाहर रहेंगे। कमीशन का अपना फंड होगा, जिसे ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान फंड’ कहा जाएगा। संसद में बिल पेश होने के दौरान विपक्ष ने विरोध जताया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और टीएमसी सांसद सौगत राय ने कहा कि यह संस्थानों की स्वायत्तता को खत्म कर केंद्र की मनमानी बढ़ाएगा। विपक्ष की आपत्ति के बाद बिल को जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी (JPC) को भेजने का फैसला लिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार बहु-रेगुलेटर सिस्टम की समस्याओं को दूर करेगा, जैसे असंगत मानक और अनावश्यक हस्तक्षेप। इससे संस्थान अधिक नवाचार कर सकेंगे और भारत वैश्विक शिक्षा हब बनेगा। यह विधेयक उच्च शिक्षा को अधिक प्रभावी, समावेशी और अनुसंधान-उन्मुख बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि यह पारित होता है, तो लाखों छात्रों और संस्थानों पर इसका गहरा असर पड़ेगा, जो शिक्षा को विकसित भारत के सपने से जोड़ेगा।
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