कोलकाता, 10 दिसंबर 2025। Babri Masjid Bengal: पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने एक बार फिर धमाल मचा दिया है। मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर से विधायक कबीर ने शनिवार (6 दिसंबर 2025) को बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं बरसी पर बेलडांगा में प्रतीकात्मक ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव रखी।
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इसके ठीक बाद उन्होंने खुद को “बंगाल का ओवैसी” बताते हुए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया। साथ ही, नई पार्टी बनाने की घोषणा से टीएमसी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। यह घटना बाबरी मस्जिद विध्वंस की संवेदनशील तारीख पर हुई, जिससे राजनीतिक हंगामा मच गया।
कड़ी सुरक्षा के बीच रेजिनगर में आयोजित कार्यक्रम में कुरान पाठ के बाद कबीर ने नींव रखी। हजारों लोग शामिल हुए, जिनमें सऊदी अरब से आए मौलाना भी थे। कबीर ने कहा, “33 साल पहले जो तोड़ा गया, वो फिर बनेगा। यह अल्लाह का घर है, राजनीति से अलग।” उन्होंने दावा किया कि मस्जिद निर्माण के लिए 9 दिसंबर तक 2.71 करोड़ रुपये का चंदा इकट्ठा हो चुका है। हालांकि, विवाद बढ़ने पर कबीर ने नाम बदल दिया – अब मस्जिद का एक गेट ‘बाबर’ के नाम पर बनेगा। कबीर का AIMIM से गठबंधन का ऐलान बंगाल की 2026 विधानसभा चुनाव से पहले आया है।
उन्होंने कहा, “मैं बंगाल का ओवैसी हूं। ओवैसी के साथ मिलकर टीएमसी और बीजेपी दोनों को चुनौती देंगे। हम किंगमेकर बनेंगे।” बंगाल में 35% मुस्लिम आबादी है, जो टीएमसी का मजबूत वोट बैंक है। कबीर का यह दांव ममता के इस बैंक में सेंध लगाने का प्रयास लगता है। बिहार चुनाव में AIMIM की सफलता का हवाला देते हुए कबीर ने कहा कि बंगाल में भी ‘खेला’ होगा। टीएमसी ने कबीर को निलंबित कर दिया था, लेकिन उनका यह कदम पार्टी के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है।
बीजेपी ने हमला बोला – केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा, “ममता तुष्टिकरण की आग से खेल रही हैं। यह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण है।” बीजेपी का मानना है कि कबीर का बागी रुख उनके फायदे का है, क्योंकि मुस्लिम वोट बंटेगा। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इसे बीजेपी की साजिश बताया। कबीर पहले कांग्रेस और बीजेपी में रह चुके हैं। टीएमसी में आने के बाद भी बागी बने। ममता ने इशारों में कहा, “कुछ लोग वोट के लिए कुछ भी करेंगे।” लेकिन कबीर का ऐलान टीएमसी के मुस्लिम समर्थन को कमजोर कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बंगाल की सियासत में नया अध्याय लिखेगा।
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