नई दिल्ली, 8 दिसंबर 2025। Parliament Winter Session: शीतकालीन सत्र के छठे दिन लोकसभा में “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने पर ऐतिहासिक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जहां इसे स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बताया। वहीं विपक्ष ने इसे “बंगाल चुनाव से पहले का राजनीतिक हथियार” करार दिया।
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मुख्य बयान और अहम पल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा “वंदे मातरम कभी इस्लाम-विरोधी नहीं था। कुछ लोगों ने इसे सांप्रदायिक रंग दे दिया। यह गीत सदियों से सोए देश को जगाने वाला गीत है। इसकी गूंज इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटिश संसद तक पहुंची थी। ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1905 के बंगाल विभाजन के खिलाफ वंदे मातरम चट्टान बनकर खड़ा रहा।
अंग्रेजों की “बांटो और राज करो” नीति को इस गीत ने करारा जवाब दिया। आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा – “जब वंदे मातरम के 100 साल हुए थे, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा था और संविधान का गला घोंट दिया गया था।” “वंदे मातरम केवल गीत नहीं, आजादी की पूरी यात्रा की भावना है। दुनिया में ऐसा दूसरा भाव-काव्य मिलना मुश्किल है।”
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “वंदे मातरम पर यह चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि बंगाल में चुनाव आने वाले हैं। क्रोनोलॉजी समझिए।”सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा
“वंदे मातरम ने देश को एक किया, आजादी में जान डाली। सत्ता पक्ष हमेशा हर चीज को अपना बताना चाहता है। यह गीत गाने के लिए नहीं, निभाने के लिए है।”
कांग्रेस उपनेता गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए नेहरू का जिक्र किया। “ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में नेहरू जी का नाम 14 बार, संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर 10 बार… आप जितनी कोशिश कर लें, नेहरू जी के योगदान पर दाग नहीं लगा पाएंगे।
”भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने कहा, “कुछ लोग वंदे मातरम में यकीन नहीं रखते, लेकिन बाबरी मस्जिद पर रखते हैं। यह सोची-समझी रणनीति है।” भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “नेहरू जी तुष्टिकरण के चलते वंदे मातरम के खिलाफ थे और इसे सांप्रदायिक बता रहे थे।”
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