नई दिल्ली, 8 दिसंबर 2025। Parliament LIVE: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर आज भारतीय संसद दोनों सदनों में इसे समर्पित विशेष चर्चा का गवाह बनेगी। लोकसभा में ठीक दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं चर्चा की शुरुआत करेंगे। कल 9 दिसंबर को राज्यसभा में भी यह चर्चा चलेगी जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ मंत्री हिस्सा लेंगे। सोमवार सुबह लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित समय पर शुरू हो गई।
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नियम के अनुसार सबसे पहले प्रश्नकाल चला। इसके बाद सदन में ‘वंदे मातरम’ पर केंद्रित विशेष चर्चा शुरू होगी। यह पहला मौका है जब संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रीय गीत को लेकर इतने बड़े स्तर पर औपचारिक विमर्श आयोजित किया जा रहा है।
भाजपा नेताओं का तीखा हमला
चर्चा से पहले ही भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधना शुरू कर दिया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “कुछ लोग वंदे मातरम में विश्वास नहीं रखते, लेकिन बाबरी मस्जिद पर ज़रूर रखते हैं। ममता बनर्जी ने सोची-समझी रणनीति के तहत कोलकाता में वंदे मातरम को हटवाया था, अब उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।” भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना है जिसने करोड़ों भारतीयों को गुलामी के खिलाफ एकजुट किया। लेकिन नेहरू जी तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति के चलते इसके खिलाफ थे। उन्होंने इसे सांप्रदायिक करार देकर अभियान चलाया था। आज पूरा देश दोनों सदनों में उस ऐतिहासिक गीत को सलाम करेगा जिसे कांग्रेस ने दबाने की कोशिश की।”
1950 में घोषित हुआ था राष्ट्रगीत घोषित
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1870 के दशक में रचित ‘वंदे मातरम’ पहली बार 1896 के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह क्रांतिकारियों का युद्ध-घोष बन गया। 15 अगस्त 1947 को आजादी की पहली सुबह पर भी संसद में यही गीत गूंजा था।
24 जनवरी 1950 को इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। संसद के इस विशेष सत्र से सरकार का संदेश साफ है – वंदे मातरम भारतीय अस्मिता और राष्ट्रप्रेम का अभिन्न अंग है। आज सदन में सिर्फ चर्चा नहीं, देश के स्वाभिमान की 150 साल पुरानी गूंज एक बार फिर सुनाई देगी।
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