नई दिल्ली, 7 दिसंबर 2025। Kharmas 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) रात 10:19 बजे सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे और 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति पर मकर राशि में जाते ही खरमास समाप्त हो जाएगा। यह पूरा एक माह “खरमास” कहलाता है। इस दौरान सूर्य बृहस्पति की राशि में रहते हैं, जिसे ज्योतिष में “गुर्वादित्य योग” कहा जाता है। इस योग में सूर्य और गुरु दोनों की शक्ति कम हो जाती है, इसलिए विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
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खरमास में क्या न करें?
विवाह, सगाई, चौल-मुंडन, नए घर का प्रवेश
नया व्यवसाय शुरू करना, दुकान-ऑफिस का उद्घाटन
भूमि-वाहन खरीदने के बड़े सौदे (जरूरी छोटी खरीदारी कर सकते हैं)
कोई भी नया शुभ मुहूर्त शुरू करने वाला कार्य
खरमास में क्या करें?
रोज सूर्य को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें, “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें
भागवत कथा, श्रीराम कथा, शिव पुराण या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
नदी स्नान, तीर्थ दर्शन, मंदिरों में पूजा-आरती
जरूरतमंदों, ब्राह्मणों और गरीबों को दान-पुण्य (इसका अक्षय फल मिलता है)
दान की प्रमुख वस्तुएं: घी, तिल, कंबल, गुड़, तांबे का बर्तन, लाल कपड़ा, अन्न, नमक, तेल, कुमकुम, फूल-हार, दीपक-धूपबत्ती
दान का विशेष महत्व
खरमास में किया गया दान तीर्थ-स्नान के बराबर पुण्य देता है। निष्काम भाव से किए गए व्रत-उपवास और दान से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
मौसमी बदलाव
खरमास में हेमंत ऋतु रहती है। दिन छोटे, रातें लंबी हो जाती हैं। अचानक ठंड, कोहरा, ओस और कभी-कभी बारिश-बर्फबारी भी होती है।
पौराणिक कथा
कथा है कि सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सारा ब्रह्मांड नापते हैं, रुकना मना है। एक बार घोड़े थक गए। सूर्यदेव ने उन्हें तालाब किनारे पानी पिलाने रुकवाया, लेकिन रथ रुकना पाप था। पास में दो गधे (खर) खड़े थे। सूर्य ने मजबूरी में गधों को रथ में जोत लिया। गधों से रथ धीरे चला, इसलिए इस पूरे मास में सूर्य की गति मंद पड़ जाती है और इसे “खरमास” कहते हैं। घोड़े आराम करके लौटे तो रथ फिर तेज चला, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। खरमास आध्यात्मिक साधना, दान और पुराने कर्मों को सुधारने का सुनहरा समय है। 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ ही सभी शुभ कार्य फिर शुरू हो जाएंगे।
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