नई दिल्ली, 6 दिसंबर 2025। Health Crisis: आम आदमी पार्टी (AAP) के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ मोहल्ला क्लीनिकों पर अब संकट के बादल और गहरा गए हैं। दिल्ली सरकार ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (U-AAM) के पास स्थित 95 और मोहल्ला क्लीनिकों को बंद करने का नोटिस जारी कर दिया है। इससे पहले ही 200 से अधिक क्लीनिक बंद हो चुके हैं, और अब कुल 600 से ज्यादा डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स व अन्य कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में हैं। प्रभावित स्टाफ ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है।
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मोहल्ला क्लीनिक योजना 2015 में AAP सरकार द्वारा शुरू की गई थी, जो गरीबों को मुफ्त प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती थी। इन क्लीनिकों में ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, हीमोग्लोबिन, किडनी-लिवर फंक्शन टेस्ट समेत 90 से ज्यादा जांचें मुफ्त होती हैं। शहर में कुल 500 से अधिक क्लीनिक हैं, जो रोजाना हजारों मरीजों का इलाज करते हैं।
एक डॉक्टर ने बताया, “हमारी आय मरीजों की संख्या पर निर्भर है – डॉक्टर को प्रति मरीज 40 रुपये, फार्मासिस्ट को 12, नर्स को 10 और मल्टी-टास्क वर्कर को 8 रुपये मिलते हैं। बंदी से परिवारों का पेट पालना मुश्किल हो जाएगा।”सरकार का फैसला और विरोधफरवरी 2025 में BJP सरकार सत्ता में आने के बाद से मोहल्ला क्लीनिकों पर तलवार लटक गई है। मार्च में 250 क्लीनिकों को वित्तीय अनियमितताओं के नाम पर बंद करने का ऐलान किया गया। नवंबर में 170 और 200 क्लीनिक बंद हो चुके हैं, जिनमें से कई किराए की जगहों पर चल रहे थे।
स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि ये क्लीनिक “कागजों पर ही मौजूद थे” और किराया धोखाधड़ी का केंद्र थे। सरकार का दावा है कि U-AAM बेहतर विकल्प हैं, जहां इन-हाउस टेस्टिंग और प्रीनेटल चेकअप जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने इसे “स्वास्थ्य माफिया का दबाव” बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “BJP ने वादा किया था कि AAP की योजनाएं नहीं बंद होंगी, लेकिन 800 से ज्यादा लोगों की आजीविका छीन ली। ये गरीबों का स्वास्थ्य बर्बाद करने की साजिश है।” AAP विधायक कुलदीप कुमार ने भी BJP को “गरीब-विरोधी” ठहराया। एक मीटिंग में डॉक्टरों ने फैसले को चुनौती देने का संकल्प लिया।
कर्मचारियों पर संकट
30 अक्टूबर को 121 डॉक्टरों को नौकरी से हटाने का लेटर मिला, जिसमें दो हफ्ते का नोटिस दिया गया। इसके अलावा सैकड़ों ANM (ऑक्जिलरी नर्स मिडवाइफ) और मल्टी-टास्क स्टाफ को भी नोटिस जारी हो चुके हैं। कर्मचारी एसोसिएशन के अनुसार, U-AAM में नई भर्ती हो रही है, लेकिन पुराने स्टाफ को अवशोषित नहीं किया जा रहा।
दवा की कमी भी क्लीनिकों को प्रभावित कर रही है। 100 से ज्यादा एसेंशियल दवाएं, जैसे मेट्रोगिल और कफ सिरप, स्टॉक में नहीं हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए है। AAP ने चेतावनी दी है कि प्रदूषण संकट के बीच स्वास्थ्य सेवाओं का कमजोर होना जनता के लिए घातक साबित होगा। डॉक्टरों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर योजना को बचाने की हर कोशिश करेंगे।
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