नई दिल्ली, 6 दिसंबर 2025। Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा ने न केवल भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती दी, बल्कि पड़ोसी पाकिस्तान को गहरी चोट पहुंचा दी। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गहन द्विपक्षीय चर्चाओं के बाद, भारत से रवानगी के ठीक पहले पुतिन ने अफगानिस्तान और तालिबान पर ऐसे बयान दिए, जो पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए नमक छिड़कने वाले साबित हुए।
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यह ‘कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक’ क्षेत्रीय समीकरणों को हिला गया और इस्लामाबाद में खलबली मचा दी। एक विशेष साक्षात्कार में पुतिन ने अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, “दुनिया का हर देश चुनौतियों से जूझता है, अफगानिस्तान भी अपवाद नहीं, लेकिन तालिबान ने सत्ता संभालते ही आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय कदम उठाए हैं।” पुतिन ने विशेष रूप से अफीम उत्पादन पर सख्त रोक लगाने और मादक पदार्थों की तस्करी को ध्वस्त करने के तालिबान के प्रयासों की तारीफ की।
उनके शब्दों में, “अफगानिस्तान दशकों तक गृहयुद्ध की आग में झुलसा, लेकिन अब सरकार ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। ISIS-K जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई और ड्रग्स तस्करी पर प्रहार से साबित होता है कि तालिबान स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।” यह बयान पाकिस्तान के लिए करारा तमाचा था, क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से तालिबान पर आतंकवाद को शरण देने और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता रहा है।
पुतिन ने जोर देकर कहा, “आपको इसे स्वीकार करना होगा, क्योंकि यही सच्चाई है।” रूस दुनिया का पहला प्रमुख देश है जिसने तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता दी है। उन्होंने अफगानिस्तान से दूरी बनाने के बजाय संवाद बनाए रखने की वकालत की, जो भारत-रूस की संयुक्त रणनीति का हिस्सा है। 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने का संकल्प दोहराया, जिसमें हाल के पहलगाम हमले का जिक्र भी शामिल था।
यह पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष चेतावनी था, जहां मुनीर की सेना पर आतंकी तत्वों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं। पाकिस्तान में यह बयान सुनामी की तरह फैला। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने इसे ‘भारत-रूस की साजिश’ करार दिया, जबकि अफगानिस्तान के तालिबान ने खुशी जताई। इस्लामाबाद को डर है कि रूस-भारत का बढ़ता प्रभाव अफगानिस्तान पर पाक की पकड़ ढीली कर देगा।
यात्रा के दौरान रक्षा, ऊर्जा और परिवहन समझौतों ने भी पाक को चिंतित किया। पुतिन ने मोदी की तारीफ करते हुए कहा, “भारत खुशकिस्मत है कि उसके पास मोदी जैसे नेता हैं, जो किसी दबाव में नहीं आते।” यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता—बलूचिस्तान और अन्य प्रांतों में विद्रोह—को और उजागर करता है। कुल मिलाकर, पुतिन का यह बयान क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदलने वाला साबित हो रहा है। पाकिस्तान अब नई रणनीति तलाशने को मजबूर है, जबकि भारत-रूस की साझेदारी ध्रुव तारे की तरह चमक रही है।








