नोएडा, 4 दिसंबर 2025। Mayawati Rally: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बड़ा दिल दिखाते हुए 6 दिसंबर को नोएडा के राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर प्रस्तावित अपनी विशाल जनसभा को अचानक रद्द कर दिया। यह रैली बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के 69वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित की जानी थी, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, एनसीआर और उत्तराखंड से लाखों कार्यकर्ता शामिल होने वाले थे।
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मायावती ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर रैली रद्द करने की घोषणा की। उन्होंने इसका कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी Z-plus श्रेणी की VIP सुरक्षा के चलते भारी पुलिस बल तैनात होता है, जिससे सड़कों पर जाम लगता है और आमजनता, विशेषकर महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन जाती है।
उन्होंने लिखा, “मेरे अपने लोगों को मेरी वजह से तकलीफ हो, यह मैं कतई बर्दाश्त नहीं कर सकती, इसलिए इस बार मैं खुद नोएडा नहीं आऊंगी। ”बसपा सुप्रीमो ने कहा कि वह लखनऊ स्थित अपने आवास पर ही निजी रूप से बाबासाहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी और कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे बिना किसी राजनीतिक दिखावे के शांति पूर्वक श्रद्धासुमन अर्पित करें।
उन्होंने 2019 की दिल्ली रामलीला मैदान रैली का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि उस दिन भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था के कारण हजारों लोग गेट पर घंटों फंसे रहे थे और कई महिलाएं-बच्चे बेहोश हो गए थे। उस घटना के बाद उन्होंने ठान लिया था कि अगर उनकी वजह से एक भी बहुजन को परेशानी हुई तो वह बड़ी रैली करने के बजाय घर पर ही रहना पसंद करेंगी।रैली रद्द होने की खबर फैलते ही बसपा कार्यकर्ताओं में मायूसी की लहर दौड़ गई।
नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर समेत कई जिलों से सैकड़ों बसें बुक हो चुकी थीं। कई कार्यकर्ताओं ने छुट्टी तक ले ली थी, लेकिन कुछ ही घंटों में पार्टी के व्हाट्सएप ग्रुपों में एक संदेश वायरल हो गया – “बहन जी ने फिर साबित कर दिया कि वो सिर्फ नेता नहीं, हमारी बड़ी बहन हैं।” अब 6 दिसंबर को नोएडा के राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर कार्यकर्ता स्वयं पहुंचकर शांतिपूर्ण ढंग से बाबासाहेब को श्रद्धांजलि देंगे। पूरे उत्तर प्रदेश में जिला एवं ब्लॉक स्तर पर छोटे-छोटे शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे मायावती का मास्टर-स्ट्रोक बताया है। एक तरफ उन्होंने जनता के प्रति अपनी संवेदनशीलता और सादगी का परिचय दिया, तो दूसरी तरफ विपक्षी दलों को कोई मौका भी नहीं छोड़ा। नीली पताकें तो लहराएंगी, पर उस चेहरे की कमी हर कार्यकर्ता को खलेगी जिसे देखने लाखों आंखें बेकरार थीं।
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