नई दिल्ली, 2 दिसंबर 2025। पृथ्वी का नक्शा एक बार फिर बदलने वाला है – और इस बार पूरा अफ्रीका महाद्वीप दो हिस्सों में बंट जाएगा! वैज्ञानिकों ने पुष्टि कर दी है कि अफ्रीका धीरे-धीरे लेकिन लगातार फट रहा है। यह प्रक्रिया लाखों साल पुरानी है, लेकिन अब इसके सबसे ठोस सबूत सामने आए हैं। ‘Journal of African Earth Sciences’ में प्रकाशित नई रिसर्च के अनुसार, अफ्रीका के नीचे चल रही टेक्टोनिक प्लेटों की खिंचाव प्रक्रिया इतनी तेज हो गई है कि आने वाले 5 से 10 मिलियन सालों में यह महाद्वीप दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो जाएगा।
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एक हिस्सा पश्चिमी और मध्य अफ्रीका (नाइजीरिया, घाना, नामीबिया, अल्जीरिया आदि) का होगा, जबकि दूसरा हिस्सा पूर्वी अफ्रीका – सोमालिया, केन्या, तंजानिया, इथियोपिया और मोज़ाम्बिक का नया छोटा महाद्वीप बनेगा। इस विभाजन का मुख्य कारण है दुनिया की सबसे लंबी रिफ्ट घाटी – ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट सिस्टम। यह 6,000 किलोमीटर से ज्यादा लंबी दरार जॉर्डन से लेकर मोज़ाम्बिक तक फैली हुई है। हर साल यह दरार कुछ मिलीमीटर चौड़ी होती जा रही है।
वैज्ञानिकों ने इसे “जिप खुलने” जैसी तुलना दी है – जैसे कोई जैकेट ऊपर से नीचे तक खुल रही हो। सबसे खास खोज अफ्रीका के अफार क्षेत्र (इथियोपिया-जिबूती) में हुई है, जहां तीन बड़ी रिफ्टें – लाल सागर, एडन की खाड़ी और ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट – एक ट्रिपल जंक्शन बनाती हैं। यही वह जगह है जहां महाद्वीप सबसे पहले टूटते हैं। शोधकर्ताओं ने 1968-69 में एकत्र किए गए पुराने चुंबकीय डेटा को नई तकनीक से दोबारा पढ़ा। इसमें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बार-बार उलटने (मैग्नेटिक रिवर्सल) के निशान मिले, जो बताते हैं कि यहां पहले भी समुद्र तल फैलाव हो चुका है – ठीक वैसे ही जैसे आज अटलांटिक महासागर बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जब यह दरार पूरी तरह खुल जाएगी तो हिंद महासागर का पानी भरकर एक नया महासागर बन जाएगा। केन्या-तंजानिया की मशहूर झीलें जैसे विक्टोरिया, तुर्काना और मलावी भी दो हिस्सों में बंट जाएंगी। हालांकि यह बदलाव हमारी जिंदगी में नहीं होगा, लेकिन यह साबित करता है कि पृथ्वी अभी भी जीवंत और बदलती हुई है। लाखों साल बाद हमारे वंशज जिस दुनिया को देखेंगे, उसमें अफ्रीका जैसा हमें आज दिखता है, वैसा नहीं रहेगा।
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