नई दिल्ली, 1 दिसंबर 2025। Delhi Pollution: दिल्ली-एनसीआर में लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहे वायु प्रदूषण से सुप्रीम कोर्ट बेहद नाराज़ है। सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा, “हम चुप होकर नहीं बैठ सकते। लोगों की जान जा रही है, यह आपातकालीन स्थिति है।”
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कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को सख्त हिदायत दी कि एक हफ्ते के अंदर ठोस कदमों की रिपोर्ट पेश करें, वरना अदालत खुद कड़े कदम उठाएगी। कोर्ट ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) पर भी सवाल उठाए कि GRAP-4 के तहत घोषित सभी प्रतिबंधों का सही से पालन क्यों नहीं हो रहा। जस्टिस ओका ने टिप्पणी की, “आप GRAP लागू करते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता।
निर्माण कार्य अभी भी चल रहे हैं, पुराने डीजल वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यह सब बंद क्यों नहीं हो रहा?” सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से पराली जलाने (stubble burning) के मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा सरकारों को लताड़ा। कोर्ट ने पूछा कि पिछले साल दिए गए निर्देशों के बावजूद इस साल भी हजारों मामले क्यों दर्ज हो रहे हैं? कोर्ट ने साफ कहा कि पराली जलाने वालों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने और राजस्व रिकॉर्ड में इंदराज करने जैसे कदम तुरंत लागू किए जाएं।
दिल्ली में पिछले कई दिनों से AQI 450-500 के बीच बना हुआ है, जो “गंभीर प्लस” श्रेणी में आता है। कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या वायु प्रदूषण को “राष्ट्रीय आपातकाल” घोषित करने का समय नहीं आ गया? साथ ही कोर्ट ने दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों पर पूर्ण प्रतिबंध और निर्माण-विध्वंस गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए।कोर्ट ने CAQM को भी फटकार लगाते हुए कहा कि सिर्फ बैठकें करने से प्रदूषण नहीं रुकेगा।
अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। तब तक सभी सरकारों को बताना होगा कि उन्होंने GRAP-4 के तहत क्या-क्या कदम उठाए और आगे की रणनीति क्या है।सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश है – अब और बहाने नहीं चलेंगे। अगर एक हफ्ते में ठोस सुधार नहीं दिखा तो अदालत खुद हस्तक्षेप करेगी।
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