कोलंबो, 29 नवंबर 2025। Cyclone Ditwah। बंगाल की खाड़ी में विकसित चक्रवाती तूफान ‘दितवाह’ ने श्रीलंका को बुरी तरह जकड़ लिया है। तेज हवाओं, भारी बारिश और बाढ़ ने पूरे द्वीप राष्ट्र को तबाह कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तूफान से अब तक 123 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लापता बताए जा रहे हैं। कोलंबो सहित दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में बाढ़ ने हजारों घरों को पानी में डुबो दिया, जिससे 18,000 से ज्यादा लोग सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं। यह श्रीलंका की 2017 के बाद की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदा है।
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तूफान ने श्रीलंका के पूर्वी तट को रगड़ते हुए उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ना शुरू कर दिया। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दितवाह वर्तमान में श्रीलंका तट के पास स्थित है और 30 नवंबर की सुबह तक उत्तर तमिलनाडु-पुदुचेरी तट के निकट पहुंच सकता है। पिछले 24 घंटों में कुछ क्षेत्रों में 360 मिमी तक बारिश दर्ज की गई, जिससे केलानी नदी उफान पर आ गई। कोलंबो में सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं, प्रमुख राजमार्ग अवरुद्ध हैं, बिजली और संचार व्यवस्था चरमरा गई है।

स्कूल, ट्रेन सेवाएं और कोलंबो स्टॉक एक्सचेंज बंद हैं। सेना ने हेलीकॉप्टर तैनात कर फंसे परिवारों को छतों और पेड़ों से बचाया, जिसमें नारियल के पेड़ पर चढ़े हुए एक व्यक्ति को एयरलिफ्ट किया गया। आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) ने चेतावनी दी है कि अगले 12 घंटों में और बाढ़ का खतरा है। चाय बागानों वाले केंद्रीय हाइलैंड्स में भूस्खलन से 3,000 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हो गए। अनुराधापुरा जिले में एक बस फंस गई, जिसके यात्रियों को बचाने के लिए हेलीकॉप्टर मांगा गया।
संसद में सांसद अजीत पेरेरा ने आपातकाल की घोषणा की मांग की। तूफान के प्रभाव से श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को भी झटका लगा, खासकर पर्यटन और कृषि क्षेत्र में।इस बीच, कोलंबो के बांडारनायके इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भारी मार झेलना पड़ा। तेज हवाओं और बारिश से उड़ानें रद्द हो गईं, जिससे करीब 300 भारतीय यात्री तीन दिनों से फंसे हुए हैं। इनमें 150 तमिलनाडु के निवासी शामिल हैं, जो दुबई से चेन्नई लौट रहे थे।
15 से ज्यादा उड़ानें तिरुवनंतपुरम, कोच्चि या अन्य भारतीय हवाई अड्डों पर डायवर्ट की गईं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भारतीय दूतावास से समन्वय कर फंसे यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। भारत ने तुरंत ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू कर श्रीलंका की मदद भेजी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक संदेश देते हुए कहा, “श्रीलंका के भाई-बहनों के साथ हम दुख में खड़े हैं। भारत ने इमरजेंसी सहायता भेजी है।”

28-29 नवंबर की रात को हिंदन एयर बेस से आईएएफ के आईएल-76 और सी-130जे विमानों ने 21 टन राहत सामग्री, 80 एनडीआरएफ जवान, 4 कुत्ते और विशेष उपकरण कोलंबो पहुंचाए। आईएनएस विक्रांत को बचाव कार्यों में तैनात किया गया। भारतीय उच्चायोग ने एयरपोर्ट पर इमरजेंसी हेल्प डेस्क स्थापित किया। तमिलनाडु में 14 एनडीआरएफ टीमें तैनात हैं, क्योंकि तूफान भारत के तट पर भी असर डाल सकता है।यह आपदा पड़ोसी देशों के बीच मजबूत संबंधों को रेखांकित करती है। श्रीलंका सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है, जबकि भारत ने और मदद का वादा किया। अब सवाल यह है कि क्या तूफान का असर भारत तक सीमित रहेगा या और विनाश मचाएगा।
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