महाराष्ट्र, 28 नवंबर 2025। Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर उथल-पुथल मच गई है। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच चल रही खींचतान के बीच राज्य सरकार के मंत्री दादा भुसे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को नंदुरबार में एक रैली को संबोधित करते हुए स्कूली शिक्षा मंत्री भुसे ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे जल्द ही फिर से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे।
उन्होंने कहा, “आप सभी देखेंगे कि महाराष्ट्र का नेतृत्व एक बार फिर एकनाथ शिंदे साहेब के हाथों में होगा। आज भी अगर लोगों से पूछा जाए कि उनका पसंदीदा मुख्यमंत्री कौन है, तो वे एकनाथ शिंदे का नाम ही लेंगे। “यह बयान वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। भुसे ने शिंदे की तारीफों के पुल बांधे और कहा कि शिंदे जैसे मुख्यमंत्री महाराष्ट्र ने पहले कभी नहीं देखा। “वे देर रात तक लोगों से मिलते थे और दिन में 20-20 घंटे काम करते थे।
वे लोगों के दिलों में बसते हैं।” उनका यह बयान तब आया है जब महायुति में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले दोनों पार्टियों के बीच तनाव चरम पर है। खासकर, एक-दूसरे के नेताओं को पार्टी में शामिल करने और सीट बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ा हुआ है। शिवसेना को लगता है कि भाजपा उसके संगठन को कमजोर कर रही है, जबकि भाजपा शिंदे गुट पर दबाव बना रही है।मंत्री भुसे का बयान भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने हाल ही में महाराष्ट्र नेताओं को संयम बरतने की सलाह दी थी, खासकर खरीद-फरोख्त के आरोपों के बीच। लेकिन भुसे जैसे मंत्री का खुला समर्थन शिंदे गुट को मजबूती दे रहा है। विपक्षी दलों ने इसे महायुति की आंतरिक कलह का संकेत बताया है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष ने टिप्पणी की, “गठबंधन टूटने की कगार पर है, जनता देख रही है।”एकनाथ शिंदे ने 2022 में उद्धव ठाकरे सरकार गिराकर मुख्यमंत्री पद हासिल किया था, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के बाद देवेंद्र फडणवीस ने तीसरी बार कुर्सी संभाली।
शिंदे को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो पर विवाद बना हुआ है। फडणवीस ने हाल ही में कहा था कि सभी निर्णय सामूहिक होंगे, लेकिन शिंदे गुट की नाराजगी कम नहीं हो रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान आगामी स्थानीय चुनावों में शिवसेना की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।महायुति की जीत के बावजूद, सीएम पद को लेकर शुरू हुई यह जंग गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठा रही है।
क्या शिंदे फिर से सत्ता की चाबी हासिल करेंगे? या फडणवीस मजबूती से कुर्सी थामे रहेंगे? सियासी पारा चढ़ा हुआ है, और आने वाले दिनों में दिल्ली से हस्तक्षेप की संभावना है। महाराष्ट्र की जनता अब इस ड्रामे का अंत देखना चाहती है।
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