उन्नाव, 25 नवंबर 2025। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिला कांग्रेस में इन दिनों आंतरिक कलह चरम पर पहुंच गई है। मौजूदा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपनी ही पार्टी की पूर्व जिलाध्यक्ष आरती वाजपेयी सहित सात वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को वकील के माध्यम से मानहानि का कानूनी नोटिस भिजवाया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि इन नेताओं ने व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया पर जिलाध्यक्ष के खिलाफ अभद्र टिप्पणियाँ कीं, उनकी छवि धूमिल करने की साजिश रची तथा मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी।
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प्रत्येक व्यक्ति से 8 लाख रुपये हर्जाना मांगा गया है और 15 दिन के अंदर भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह मामला उस समय और तूल पकड़ गया जब जिला कार्यकारिणी गठन को लेकर दोनों गुटों में खींचतान शुरू हुई। एक पक्ष जिलाध्यक्ष कुशवाहा का समर्थन कर रहा है तो दूसरा पक्ष पूर्व जिलाध्यक्ष आरती वाजपेयी के साथ खड़ा है। नोटिस मिलने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।
कई कांग्रेसी नेताओं ने इसे “आंतरिक लोकतंत्र की हत्या” करार दिया है और प्रदेश नेतृत्व से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। नोटिस प्राप्त करने वालों में शामिल पूर्व जिलाध्यक्ष आरती वाजपेयी (लखनऊ निवासी), आशीष त्रिपाठी, फैज फारूखी, ओमकांत पांडेय, अतुल शुक्ला, अगमदेव सिंह कुशवाहा और संजीव शुक्ला के नाम हैं। इनमें से अधिकांश जिला व ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी रहे हैं। आरती वाजपेयी ने मीडिया से कहा, “मुझे अभी तक कोई नोटिस नहीं मिली है। कार्यकर्ताओं से सिर्फ चर्चा सुनी है।
नोटिस मिलने पर अपने अधिवक्ता के माध्यम से उचित जवाब दिया जाएगा। यह नोटिस पार्टी की एकता को तोड़ने की साजिश है।”दूसरी ओर जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुशवाहा का कहना है कि कुछ लोग लगातार सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें फैला रहे थे, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा था। उन्होंने इसे व्यक्तिगत मानहानि का मामला बताया और कहा कि कानून अपना काम करेगा।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह विवाद अगर जल्द नहीं सुलझा तो आगामी निकाय चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रभारी अविनाश पांडेय से तत्काल संज्ञान लेने की अपील कर रहे हैं। उन्नाव कांग्रेस का यह आंतरिक संकट पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
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