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New Labour Code: महिलाओं को नाइट शिफ्ट की छूट से 1 साल में ग्रेच्युटी तक, जानें क्या-क्या हुए बदलाव

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नई दिल्ली, 24 नवंबर 2025। New Labour Code:  भारत सरकार ने 21 नवंबर 2025 को चार नई श्रम संहिताओं को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है, जो 29 पुरानी श्रम कानूनों को समाहित करती हैं। ये संहिताएं—वेज कोड 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और ओएसएच कोड 2020—श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने के साथ-साथ उद्योगों को लचीलापन प्रदान करती हैं। इनमें महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट की छूट से लेकर फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को 1 साल में ग्रेच्युटी तक कई क्रांतिकारी बदलाव शामिल हैं।

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श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इसे ‘श्रमेव जयते’ का मंत्र बताते हुए कहा कि ये सुधार 40 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का गारंटी देंगे। महिलाओं के लिए सबसे बड़ा बदलाव नाइट शिफ्ट की अनुमति है। अब महिलाएं सभी क्षेत्रों—खनन, भारी मशीनरी, निर्माण और खतरनाक उद्योगों—में रात की शिफ्ट कर सकेंगी, बशर्ते उनकी सहमति हो और सुरक्षा उपाय जैसे परिवहन, सिक्योरिटी और शिकायत निवारण तंत्र सुनिश्चित हों।

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इससे महिला श्रम बल भागीदारी बढ़ेगी, जो वर्तमान में 3.2% बेरोजगारी के बीच 1.5 करोड़ महिलाओं को औपचारिक रोजगार दे चुकी है। इसके अलावा, समान कार्य के लिए समान वेतन (इक्वल पे फॉर इक्वल वर्क) कानूनी रूप से बाध्यकारी हो गया है, जो लिंग भेदभाव को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। मातृत्व लाभ सभी असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को 26 सप्ताह का वेतन सहित मिलेगा, और परिवार की परिभाषा में ससुर को शामिल किया गया है।

ग्रेच्युटी के नियमों में भी बड़ा परिवर्तन आया है। फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को अब केवल 1 साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा, पहले 5 साल की आवश्यकता थी। वेतन की एकसमान परिभाषा से ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य लाभों की गणना आसान हो गई है, जहां कुल वेतन का 50% बेसिक पे होना अनिवार्य है। सभी कर्मचारियों—संगठित-असंगठित—के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की गई है, जो केंद्र सरकार तय करेगी।

गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (डिलीवरी एजेंट्स, ड्राइवर्स) को पहली बार कानूनी मान्यता मिली है; एग्रीगेटर्स को अपनी टर्नओवर का 1-2% उनके कल्याण फंड में देना होगा, जिसमें बीमा, स्वास्थ्य और वृद्धावस्था लाभ शामिल हैं। कार्य समय में लचीलापन आया है: दैनिक 8-12 घंटे शिफ्ट, साप्ताहिक 48 घंटे सीमा, और ओवरटाइम पर दोगुना वेतन। 40 वर्ष से ऊपर के श्रमिकों के लिए मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य है।

आईटी-आईटीईएस सेक्टर में मासिक वेतन 7 तारीख तक जमा करना जरूरी होगा। इंटर-स्टेट माइग्रेंट वर्कर्स को पोर्टेबल लाभ मिलेंगे। डिजिटल इंस्पेक्शन और रिस्क-बेस्ड मॉडल से अनुपालन आसान होगा। ये सुधार आर्थिक विकास को गति देंगे, लेकिन राज्यों को केंद्र के साथ समन्वय करना होगा। नास्कॉम ने इसे पारदर्शी बताया, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे 16 करोड़ नई नौकरियां पैदा होंगी। कुल मिलाकर, ये संहिताएं श्रमिकों की गरिमा और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों को मजबूत करेंगी।

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