लखनऊ/नोएडा, 23 नवंबर 2025। दिल्ली के प्राशांत विहार स्कूल के बाहर हुए IED ब्लास्ट और जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद मॉड्यूल के पर्दाफाश के बाद उत्तर प्रदेश में खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों ने कमर कस ली है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में आतंकियों के संभावित “स्लीपर सेल” और लोकल सपोर्ट सिस्टम को खत्म करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा अभियान चल रहा है।
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सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह है कि यूपी ATS और खुफिया एजेंसियों ने प्रदेश में पढ़ रहे व प्रैक्टिस कर रहे 250 से अधिक कश्मीरी मूल के मेडिकल छात्रों व डॉक्टरों को अपने रडार पर ले लिया है। एक सप्ताह पहले यह संख्या करीब 200 थी, जो अब तेजी से बढ़कर 250 के पार पहुंच चुकी है। इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों के छात्र-डॉक्टर के अलावा निजी अस्पतालों में कार्यरत कश्मीरी डॉक्टर भी शामिल हैं।
ATS ने इन सभी के दस्तावेज जम्मू-कश्मीर पुलिस को वेरिफिकेशन के लिए भेज दिए हैं। इनके बैंक खाते, सोशल मीडिया एक्टिविटी, मोबाइल कॉल डिटेल्स और स्थानीय संपर्कों की गहन जांच चल रही है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश हैं। सूत्र बताते हैं कि फरीदाबाद मॉड्यूल के आतंकियों का यूपी के कई जिलों से सीधा कनेक्शन मिला है। यही वजह है कि अब प्रदेश के आधा दर्जन से ज्यादा अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों पर भी शिकंजा कस रहा है।
इनमें ज्यादातर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेज व यूनिवर्सिटी हैं, जबकि लखनऊ का एक बड़ा संस्थान भी जांच के घेरे में है। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी पर पहले से ही कानूनी कार्रवाई चल रही है। अब उसी तर्ज पर यूपी के इन संस्थानों के फंडिंग सोर्स, विदेशी चंदे, छात्रों की भर्ती प्रक्रिया और कैंपस में होने वाली गतिविधियों की बारीक जांच शुरू हो गई है। ATS, LIU और IB की संयुक्त टीमें लगातार मीटिंग कर रही हैं।
खुफिया अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली जैसे हमले के लिए आतंकी लोकल लॉजिस्टिक सपोर्ट और सुरक्षित ठिकानों के बिना कामयाब नहीं हो सकते। इसलिए अब यूपी में मौजूद हर संदिग्ध नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने का प्लान तैयार है। आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना है। यूपी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जो देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करेगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। फिर वह डॉक्टर हो या छात्र, संस्थान हो या फंडिंग एजेंट – सब पर कार्रवाई होगी।”
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