Surya Puja: हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी देवता को समर्पित हैं। रविवार का दिन भगवान सूर्य देव को अर्पित है और इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सूर्य को समस्त जगत का प्राण माना गया है। वेदों में सूर्य को “जगत की आत्मा” और “सर्व रोग निवारक” कहा गया है। आइए जानते हैं कि रविवार को ही सूर्य पूजा क्यों की जाती है और इसके पीछे की पौराणिक कथाएं क्या हैं।
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पौराणिक कारण- सूर्य का रथ और सप्ताह के दिन
पुराणों के अनुसार सूर्य देव सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। इन सात घोड़ों के नाम ही सप्ताह के सात दिनों के नामों से जुड़े हैं – सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और रवि। “रवि” सूर्य का ही एक नाम है, इसलिए रविवार को उनका दिन माना जाता है।
भगवान राम और सूर्य उपासना
रामायण में वर्णित है कि लंका विजय से पहले भगवान राम ने समुद्र तट पर कठोर तपस्या कर आदित्य हृदय स्तोत्र के माध्यम से सूर्य देव की आराधना की थी। यह घटना रविवार के दिन हुई थी। तभी से रविवार को सूर्य पूजा की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
युधिष्ठिर को सूर्य का आशीर्वाद
महाभारत में जब पांडव वनवास में थे, तब भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को अक्षय पात्र प्राप्ति के लिए रविवार को सूर्य देव की उपासना करने को कहा था। युधिष्ठिर ने रविवार व्रत और सूर्य को अर्घ्य देकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
ज्योतिषीय और वैज्ञानिक महत्व
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मकारक ग्रह माना गया है। कुंडली में कमजोर सूर्य होने पर रविवार का व्रत, सूर्य नमस्कार, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और लाल चंदन, गुड़, गेहूं, लाल फूल से पूजा करने की सलाह दी जाती है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी रविवार की सुबह सूर्य की किरणें शरीर में विटामिन-D की पूर्ति करती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं।
पूजा विधि और लाभ
सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से जल में लाल चंदन मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
“ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” मंत्र का 7, 11 या 108 बार जाप करें।
रविवार का व्रत रखें, नमक त्याग करें, गेहूं की रोटी और गुड़ का प्रसाद ग्रहण करें।
लाभ: आत्मविश्वास में वृद्धि, नेत्र ज्योति, हड्डियों की मजबूती, पिता से संबंधों में सुधार, सरकारी कामों में सफलता और रविवार को जन्मे व्यक्तियों के लिए विशेष फलदायी।
सूर्य उपासना से जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता आती है। इसलिए हर रविवार को थोड़ा समय सूर्य देव को जरूर दें।
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