नई दिल्ली, 22 नवंबर 2025। Byjus Crisis: एडटेक दिग्गज बायजूज के संस्थापक बायजू रवींद्रन को अमेरिकी अदालत से करारा झटका लगा है। डेलावेयर बैंकरप्सी कोर्ट ने उन्हें 1.07 बिलियन डॉलर (लगभग 107 करोड़ डॉलर या 9,591 करोड़ रुपये) चुकाने का आदेश दिया है। यह फैसला डिफॉल्ट जजमेंट के तहत आया है, जिसमें रवींद्रन पर फंड्स को छिपाने और गलत तरीके से ट्रांसफर करने का आरोप है।
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अदालत ने इसे ‘असाधारण’ सजा बताया, क्योंकि रवींद्रन ने कई बार कोर्ट के आदेशों की अनदेखी की। मामला बायजूज अल्फा से जुड़ा है, जो कंपनी की अमेरिकी सहायक इकाई है। 2021 में बायजूज ने वैश्विक लेंडर्स से 1.2 बिलियन डॉलर का टर्म लोन लिया था। इसमें से 533 मिलियन डॉलर को 2022 में मियामी स्थित छोटे हेज फंड कैमशाफ्ट कैपिटल में ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में 2023 में कैमशाफ्ट के इंटरेस्ट को भी संबंधित इकाइयों में शिफ्ट किया गया।
लेंडर्स, जिनकी ओर से ग्लास ट्रस्ट कंपनी लिमिटेड (GLAS) काम कर रही है, का आरोप है कि रवींद्रन ने व्यक्तिगत रूप से इन ट्रांसफरों की योजना बनाई और फंड्स को छिपाया। अदालत ने पाया कि ये पैसे बायजूज के माता-पिता कंपनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (TLPL) के लाभ के लिए इस्तेमाल हुए, लेकिन लेंडर्स को वापस नहीं किए गए। अप्रैल 2025 में GLAS और बायजूज अल्फा ने रवींद्रन व अन्य फाउंडर्स के खिलाफ मुकदमा दायर किया।
जुलाई में कोर्ट ने रवींद्रन को सिविल कॉन्टेम्प्ट घोषित किया, क्योंकि उन्होंने दस्तावेज जमा करने और डिस्कवरी प्रोसेस में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने प्रतिदिन 10,000 डॉलर का जुर्माना लगाया, जो अब लाखों डॉलर का हो चुका है। अगस्त में लेंडर्स ने डिफॉल्ट मोशन दाखिल किया। जज ने कहा, “रवींद्रन को डिफेंस पेश करने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने जानबूझकर बाधा डाली।” फैसले में 533 मिलियन डॉलर एडिंग एंड अबेटिंग के लिए, 540.6 मिलियन डॉलर कन्वर्जन और फिड्यूशरी ड्यूटी ब्रेक के लिए, तथा बाकी कॉन्टेम्प्ट सैंक्शंस के लिए चुकाने का आदेश दिया गया।
साथ ही, अल्फा फंड्स का पूरा अकाउंटिंग देने को कहा गया। रवींद्रन ने फैसले को खारिज करते हुए कहा कि यह ‘डिफॉल्ट जजमेंट’ है, जिसमें उन्हें डिफेंस पेश करने का मौका नहीं मिला। उनके वकील जे. माइकल मैकनट ने स्टेटमेंट में कहा, “कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैक्ट्स को नजरअंदाज किया। GLAS ने कोर्ट को गुमराह किया। ये फंड्स फाउंडर्स के पर्सनल गेन के लिए नहीं, बल्कि TLPL के फायदे के लिए इस्तेमाल हुए।” रवींद्रन तुरंत अपील दाखिल करने की तैयारी में हैं।
उन्होंने 2.5 बिलियन डॉलर का काउंटरक्लेम भी प्लान किया है, जिसमें GLAS पर मिसरिप्रेजेंटेशन का आरोप लगेगा। यह फैसला बायजूज के लिए मुश्किल समय में आया है। कंपनी पहले से ही दिवालिया प्रक्रिया, लॉस और रेगुलेटरी जांचों से जूझ रही है। कोविड काल में ऑनलाइन लर्निंग की डिमांड से चरम पर पहुंची बायजूज ने इंडियन क्रिकेट टीम की जर्सी स्पॉन्सरशिप और लियोनेल मेसी के साथ पार्टनरशिप जैसे बड़े डील किए थे, लेकिन अब वैल्यूएशन क्रैश और कर्ज संकट ने इसे पटक दिया। अपील का नतीजा क्या होगा, यह देखना बाकी है, लेकिन यह केस एडटेक सेक्टर में कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े कर रहा है।
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