फरीदाबाद, 22 नवंबर 2025। Al Falah University: फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गई है। हाल ही में दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार ब्लास्ट में आरोपी उमर नबी के इस संस्थान से जुड़ाव के खुलासे के बाद, खुफिया रिपोर्टों ने एक पुराना लेकिन खतरनाक कनेक्शन उजागर किया है।
इसे भी पढ़ें- अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर ED का बड़ा एक्शन, फर्जी UGC-NAAC मान्यता दिखाकर 415 करोड़ की ठगी, चेयरमैन गिरफ्तार
रिपोर्ट्स के अनुसार, यूनिवर्सिटी का एक पूर्व छात्र मिर्जा शादाब बेग इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का प्रमुख सदस्य था, जिसने 2007-2008 में देशभर में कई सीरियल ब्लास्टों की साजिश रची थी। बेग 17 साल से फरार है और अफगानिस्तान या पाकिस्तान में छिपा होने का संदेह है। अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज (जो 2014 में यूनिवर्सिटी का दर्जा पाया) से 2007 में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में बीटेक पूरा करने वाले शादाब बेग मूल रूप से आजमगढ़, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।
खुफिया एजेंसियों की मानें, तो बेग आईएम की ‘रीढ़’ था। उसकी इंजीनियरिंग की नॉलेज ने बम बनाने और आईईडी प्लांटिंग में अहम भूमिका निभाई। 2007 के गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट में उसका नाम पहली बार उभरा, जहां 6 लोग घायल हुए। इसके बाद 2008 में जयपुर, अहमदाबाद, दिल्ली और गोरखपुर धमाकों में उसकी संलिप्तता साबित हुई। अहमदाबाद ब्लास्ट में 50 से ज्यादा मौतें हुईं, जबकि जयपुर में 80 से अधिक लोग प्रभावित हुए।
बेग ने उडुपी जाकर विस्फोटक जुटाए और आईएम मॉड्यूल का संचालन किया। बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े नेटवर्क में भी उसके तार थे। दिल्ली पुलिस, एनआईए और ईडी जैसी एजेंसियां अब अल-फलाह को ‘कट्टरपंथीकरण पाइपलाइन’ मान रही हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले डेढ़ दशक में यूनिवर्सिटी के कई छात्र आतंकी गतिविधियों से जुड़े पाए गए। हाल के ब्लास्ट में गिरफ्तार संदिग्ध डॉक्टर मुजम्मिल शकील (जो अल-फलाह में चार साल पढ़ाया) और मुजामिल गनी के सिम कार्ड व विस्फोटक सप्लाई के मामले ने संदेह गहरा दिया।
पंजाब पुलिस ने भी यूनिवर्सिटी का दौरा कर छात्रों-कर्मचारियों के रिकॉर्ड खंगाले। ईडी ने संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को 415 करोड़ की वित्तीय अनियमितता और जाली मान्यता के आरोप में गिरफ्तार किया है। यूजीसी-एनएएसी रिपोर्ट में गंभीर खामियां मिलीं, जिसके बाद दो एफआईआर दर्ज हुईं।
यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। क्या अल-फलाह सिर्फ शिक्षा का केंद्र है या भर्ती का अड्डा? जांच तेज हो गई है और बेग जैसे फरार आतंकियों के नेटवर्क को तोड़ने की कोशिशें जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संस्थानों पर सख्त निगरानी जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी साजिशें न रच सकें।
इसे भी पढ़ें- Amit Shah Warned: दिल्ली ब्लास्ट पर अमित शाह की सख्त चेतावनी, ऐसी सजा देंगे कि दुनिया देखेगी








