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Urine Bottle Case: सोशल मीडिया पर रील देख मुस्लिम बच्चों ने हिंदू छात्रों की बोतल में मिलाया पेशाब, गांव में तनाव

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Urine Bottle Case

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 बागपत, 15 नवंबर 2025। Urine Bottle Case: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के ढिकोली गांव में एक प्राथमिक विद्यालय से सनसनीखेज घटना सामने आई है, जो सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों की भयावहता को उजागर करती है। यहां तीन मुस्लिम छात्रों पर दो हिंदू छात्रों की पानी की बोतलों में पेशाब मिलाने का गंभीर आरोप लगा है। कथित तौर पर, छात्रों ने अपने पिता के मोबाइल पर देखी एक विवादास्पद रील के प्रभाव में यह कृत्य किया, जिसका खामियाजा अब न केवल बच्चों को, बल्कि उनके परिवारों को भी भुगतना पड़ रहा है।

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घटना के खुलासे के बाद गांव में तनाव फैल गया, और परिजनों ने स्कूल में जमकर हंगामा काटा। यह मामला शुक्रवार को तब सुर्खियों में आया जब पीड़ित हिंदू छात्र घर लौटे और अपनी मां को पूरी घटना बताई। उन्होंने बताया कि सहपाठी छात्रों ने उनकी बोतलों में पेशाब मिला दिया था, जिसे पीने के बाद एक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने तत्काल स्कूल पहुंचकर प्रधानाचार्य से शिकायत की। जांच में पाया गया कि अन्य छात्रों ने ही इस हरकत को देखा था। बोतलों की जांच पर आरोप सही साबित हुए।

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आक्रोशित ग्रामीणों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसमें दोषी छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी। कुछ ग्रामीणों ने गांव के एक मौलवी पर आरोप लगाया कि वह छात्रों को भड़का रहा है और गलत शिक्षा दे रहा है। उन्होंने मौलवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। हंगामे की सूचना मिलते ही थाना चांदीनगर पुलिस और सीओ खेकड़ा रोहन चौरसिया फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित भीड़ को शांत किया और जांच का भरोसा दिलाया।

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि छात्रों ने पिता के फोन पर एक जहरीली रील देखी, जिसमें ऐसी ही घृणित हरकत को बढ़ावा दिया जा रहा था। सीओ चौरसिया ने स्पष्ट किया, “सोशल मीडिया पर उपलब्ध गलत कंटेंट बच्चों के मानसिक विकास को नुकसान पहुंचा रहा है। अभिभावक जिम्मेदार हैं कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखें।” प्रधानाचार्य की शिकायत पर दोषी छात्रों के पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस ने छात्रों को जुवेनाइल होम भेजने की बजाय काउंसलिंग पर जोर दिया है।

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यह घटना पश्चिमी यूपी के ग्रामीण इलाकों में धार्मिक संवेदनशीलता को और उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बिना फिल्टर के वायरल हो रहे वीडियो नफरत फैला रहे हैं, जो मासूम दिमागों को विषाक्त कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें अभिभावकों को डिजिटल साक्षरता सिखाई जाएगी।

साथ ही, वन स्टॉप सेंटर पर बच्चों के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित होंगे। यह हादसा चेतावनी है कि अनियंत्रित स्क्रीन टाइम कितना विनाशकारी हो सकता है। उम्मीद है कि जांच पूरी होने पर न्याय मिलेगा और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। समाज को एकजुट होकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

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