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Bihar Election 2025: NDA ने 202 सीटों पर जमाया कब्जा, टूटा महागठबंधन का सपना

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Bihar Election 2025

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पटना, 15 नवंबर 2025। Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोकतंत्र में हर वोट की कीमत होती है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 243 सीटों में से 202 पर कब्जा जमाकर ऐतिहासिक जीत हासिल की, जबकि महागठबंधन को महज 34 सीटें नसीब हुईं।

भाजपा को 89, जद(यू) को 85 और लोजपा (रामविलास) को 19 सीटें मिलीं, जो गठबंधन की मजबूती को दर्शाती हैं। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को 25, कांग्रेस को 6 और अन्य को बिखरी हुई सीटें। यह जीत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पांचवीं सत्ता सुनिश्चित करती है, लेकिन कुछ सीटों पर इतने बारीक अंतर ने हारने वालों के सत्ता के सपनों को चूर-चूर कर दिया।

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चुनावी ड्रामा की असली कहानी उन सीटों पर छिपी है, जहां जीत-हार का फैसला कुछ सौ या फिर डबल डिजिट वोटों से हुआ। सबसे कांटे की टक्कर संदेश विधानसभा में देखने को मिली, जहां जद(यू) के राधा चरण साह ने आरजेडी के दीपू सिंह को महज 27 वोटों से हराया। साह को 80,598 जबकि सिंह को 80,571 वोट मिले।

Bihar Election 2025

यह अंतर इतना बारीक था कि हारने वाले खेमे में सन्नाटा छा गया, क्योंकि यह सीट महागठबंधन के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई थी। इसी तरह, आगियां (आरा) में भाजपा के महेश पासवान ने सीपीआई(एमएल) के शिव प्रकाश रंजन को 95 वोटों से शिकस्त दी। पासवान को 69,412 और रंजन को 69,317 वोट पड़े, जो दिखाता है कि वामपंथी दलों की जड़ें अभी भी मजबूत हैं, लेकिन NDA की एकजुटता ने बाजी मार ली।

अन्य करीबी सीटों में फोर्ब्सगंज पर कांग्रेस के मनोज विश्वास ने भाजपा के विद्या सागर केशरी को 221 वोटों से हराया, जबकि चंपतिया में कांग्रेस के अभिषेक रंजन ने भाजपा के उमाकांत सिंह को 602 वोटों से पछाड़ा। जहानाबाद में आरजेडी के राहुल कुमार ने जद(यू) के चंदेश्वर प्रसाद को 255 वोटों से जीत हासिल की, और रामगढ़ में बसपा के सतीश कुमार सिंह यादव ने भाजपा के अशोक कुमार सिंह को 175 (या कुछ स्रोतों में 30) वोटों से मात दी।

बोधगया, गोह, ढाका और बख्तियारपुर जैसी सीटों पर भी 793 से 981 वोटों के अंतर ने दांव पर लगे सपनों को तोड़ा। इनमें से ज्यादातर सीटें NDA के पक्ष में गईं, लेकिन महागठबंधन की कुछ जीतों ने उम्मीद जगाई।

Bihar Election 2025

ये करीबी मुकाबले न केवल स्थानीय मुद्दों जैसे बेरोजगारी, पलायन और विकास पर केंद्रित थे, बल्कि जातिगत समीकरणों ने भी बड़ा रोल निभाया। विशेषज्ञों का मानना है कि वोट डिवीजन और अंतिम घड़ी की रणनीति ने कई दिग्गजों के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने हार को स्वीकार करते हुए पुनर्मूल्यांकन का ऐलान किया, जबकि पीएम मोदी ने NDA कार्यकर्ताओं को बधाई दी।

यह चुनाव बिहार की राजनीति में NDA की मजबूती और विपक्ष की कमजोरी को रेखांकित करता है, लेकिन बारीक अंतर याद दिलाते हैं कि अगली बार हर वोट निर्णायक हो सकता है।

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