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Mr. Mint: मिस्टर मिंट का काला जाल, क्रिप्टो के नाम पर 100 करोड़ की लूट, निवेशकों के टूटे सपनों की सच्ची दास्तान

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  • धोखे की क्रिप्टो मशीन: मिस्टर मिंट स्कैम ने कैसे उड़ाए करोड़ों रुपये, बलविंदर सिंह का मायावी साम्राज्य
  • MNT टोकन का घातक जाल: स्पंजी स्कीम वर्क से क्रिप्टो फ्रॉड तक

Mr. Mint: क्रिप्टोकरेंसी का जादू आज भी लाखों लोगों को लुभाता है। एक रात में अमीर बनने का सपना, डिजिटल दुनिया की चकाचौंध, और उन हाई-रिटर्न वादों की चमक जो आंखों में तारे बिखेर देते हैं। लेकिन क्या होता है जब यह जादू एक भयानक धोखे में बदल जाता है? क्या होता है जब सपनों के पीछे छिपा होता है एक ऐसा जाल जो न सिर्फ पैसे लूट लेता है, बल्कि भरोसे को भी चूर-चूर कर देता है? आज हम बात कर रहे हैं ‘मिस्टर मिंट’ नामक उस क्रिप्टो स्कैम की, जिसने भारत के सैकड़ों निर्दोष निवेशकों को बर्बाद कर दिया।

बलविंदर छाबडा
बलविंदर छाबडा

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2022 में शुरू हुआ यह ‘स्पंजी स्कीम वर्क’ – जैसा कि इसे अंदरूनी सर्कल में कहा जाता था – क्रिप्टोकरेंसी और टोकन के नाम पर एक सुनियोजित फ्रॉड था, जिसने कुल 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की। यह कहानी सिर्फ पैसे की नहीं, बल्कि लालच, विश्वासघात और न्याय की तलाश की है। आइए, इस मायावी दुनिया के अंधेरे कोनों को खंगालते हैं। सब कुछ 2022 के उस उन्मादी दौर से शुरू हुआ, जब बिटकॉइन और इथेरियम की कीमतें आसमान छू रही थीं।

भारत में क्रिप्टो बूम का सूरज चमक रहा था, और छोटे-बड़े निवेशक नई-नई संभावनाओं की तलाश में थे। इसी बीच, छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर से दो चेहरे उभरे – बलविंदर सिंह छाबड़ा और राहुल भदौरिया। बलविंदर, एक स्मार्ट बिजनेसमैन का चेहरा लगने वाला, खुद को ‘विज़नरी फाउंडर’ बताता था। राहुल उसके साइलेंट पार्टनर थे, जो बैकग्राउंड में सारी रस्सियां खींचते। दोनों ने मिलकर ‘मिस्टर मिंट’ प्रोजेक्ट लॉन्च किया, जिसका सिग्नेचर टोकन था MNT (मिंट टोकन)।

वेबसाइट mrmint.io पर इसे ‘वर्ल्ड्स फर्स्ट टोकन बैक्ड बाय क्रिप्टो माइनिंग’ कहा गया – एक ऐसा दावा जो सुनते ही दिल जीत ले। लेकिन सच्चाई? यह एक स्पंजी स्कीम थी, जहां नए निवेशकों का खून पुराने को चूसने के लिए इस्तेमाल होता। स्कैम का मूल मंत्र था ‘सस्टेनेबल एनर्जी से क्रिप्टो माइनिंग’। बलविंदर और राहुल ने दावा किया कि उनके पास दुबई और कनाडा में चार बड़े माइनिंग फार्म्स हैं, कुल 2 मेगावाट की कैपेसिटी वाले, जो सस्ती ग्रीन एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) से चलते हैं।

निवेशक इन माइनिंग रिग्स (जैसे S9 या S19Pro+ मॉडल) को ‘खरीद’ सकते थे। कॉन्ट्रैक्ट? सिर्फ 4 साल का। और प्रॉफिट? रोजाना $50 से $100 तक, बिना किसी बिजली खर्च या रिस्क के! कल्पना कीजिए – एक ऑफिस वर्कर जो सुबह 9 से शाम 6 तक नौकरी करता है, वह रातोंरात पैसिव इनकम का मालिक बन जाए। लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी। प्रोजेक्ट ने NFT (नॉन-फंजिबल टोकन्स) और प्ले-टू-अर्न गेम्स का लालच भी जोड़ा। मेटावर्स में वर्चुअल प्रॉपर्टी खरीदें, गेम खेलें और MNT टोकन कमाएं।

प्रमोद शाहू
प्रमोद शाहू

प्रेसल फेज में 2 से 4 गुना सालाना रिटर्न का वादा किया गया – एक ऐसा आकर्षण जो छोटे शहरों के निवेशकों को दीवाना बना देता, लेकिन यह सब कैसे काम करता था? ‘स्पंजी स्कीम वर्क’ का राज यही था। यह एक क्लासिक पिरामिड मॉडल था, जहां शुरुआती निवेशकों को छोटे-छोटे पेमेंट्स देकर ट्रस्ट बनाया जाता। उदाहरण के लिए, अगर कोई 1 लाख रुपये निवेश करता, तो पहले हफ्ते में 10% रिटर्न मिल जाता – काफी था भरोसा जगाने के लिए। सोशल मीडिया पर फर्जी रिव्यूज की बाढ़, फेसबुक पेज पर हजारों लाइक्स, टेलीग्राम ग्रुप्स में 5,000 से ज्यादा मेंबर्स। बलविंदर खुद वीडियोज में इंटरव्यू देता, माइनिंग फार्म्स की फोटोज शेयर करता (जो स्टॉक इमेजेस थीं), और ‘लिमिटेड टाइम ऑफर’ का डर दिखाता।

mrmining.net जैसी सब-साइट्स पर कॉन्ट्रैक्ट्स बेचे जाते। जब कोई विड्रॉल मांगता, तो ‘वेरिफिकेशन डिपॉजिट’ का बहाना – और पैसे प्राइवेट वॉलेट्स में ट्रांसफर हो जाते। MNT टोकन? वह तो वैल्यूलेस था – कोई रियल बैकिंग नहीं, कोई लिस्टिंग नहीं। यह सब एक बड़ा स्पंज था, जो नए निवेशकों के पैसे सोखकर पुरानों को थोड़ा-बहुत चुका देता, जब तक जाल फट न जाए। पीड़ितों की कहानियां दिल दहला देती हैं।

रायपुर के एक 35 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर, अजय वर्मा (नाम बदला गया), ने अपनी पूरी सेविंग्स – 5 लाख रुपये – लगा दी। “मैंने सोचा, यह मेरा टिकट है फाइनेंशियल फ्रीडम का,” वह बताते हैं। शुरुआत में प्रॉफिट आया, लेकिन जून 2023 से पेमेंट्स रुक गए। “मैंने ग्रुप में शिकायत की, तो एडमिन ने ब्लॉक कर दिया।” अंबिकापुर की एक हाउसवाइफ, प्रिया शर्मा, ने पति के कहने पर 2 लाख निवेश किए। “हमारे बेटे का कॉलेज फंड था वह। अब हम कर्ज में डूबे हैं।” कुल मिलाकर 500 से ज्यादा निवेशक फंसे – ज्यादातर छोटे शहरों से, जैसे छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र।

ठगी की राशि? 100 करोड़ रुपये से ऊपर। ये पैसे न सिर्फ व्यक्तिगत तबाही लाए, बल्कि परिवारों को तोड़ दिया। कई ने सुसाइड के बारे में सोचा, कई ने पुलिस के चक्कर काटे। रेडिट और X (पूर्व ट्विटर) पर #MrMintScam ट्रेंड करने लगा, जहां पीड़ित अपनी चीखें गूंजा रहे थे। 2025 तक यह स्कैम एक बम की तरह फटा। शिकायतों का पहाड़ खड़ा हो गया। साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्जनों FIR, और आखिरकार अक्टूबर 2025 में मुंबई पुलिस ने एक्शन लिया।

बलविंदर सिंह छाबड़ा को अंबिकापुर से गिरफ्तार किया गया। जांच में खुलासा हुआ कोई माइनिंग फार्म्स रियल नहीं थे। दुबई-कनाडा के दावे झूठे, फोटोज चुराई गईं। राहुल भदौरिया फरार है, लेकिन इंटरपोल की नजर में। ED (Enforcement Directorate) ने वॉलेट्स फ्रीज किए, लेकिन ज्यादातर पैसे विदेशी एक्सचेंजों में गायब। स्कैम एडवाइजर ने mrmint.io को ‘हाई रिस्क’ रेटिंग दी, और क्रिप्टो कम्युनिटी ने इसे ‘क्लासिक रग पुल’ कहा।

संदीप गुप्ता
संदीप गुप्ता

बलविंदर की पूछताछ में सामने आया कि यह स्कीम तीन साल से चल रही थी, और टीम में 10-12 लोग शामिल थे जो कमीशन पर काम करते। यह स्कैम सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि क्रिप्टो दुनिया की कड़वी सच्चाई है। भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन अभी भी अधूरा है – SEBI और RBI के बीच टकराव, और हजारों अनियमित प्लेटफॉर्म्स। मिस्टर मिंट जैसे फ्रॉड्स DYOR (Do Your Own Research) की कमी से पनपते हैं।

निवेशक व्हाइटपेपर नहीं पढ़ते, कंपनी की वैलिडिटी चेक नहीं करते। हाई रिटर्न्स का लालच अंधा कर देता है। लेकिन सबक? हमेशा लाइसेंस्ड एक्सचेंज इस्तेमाल करें, जैसे WazirX या CoinDCX। स्कैम पर तुरंत cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें और याद रखें, अगर कुछ बहुत अच्छा लगे, तो शायद वह धोखा है। मिस्टर मिंट की यह दास्तान हमें चेतावनी देती है, क्रिप्टो एक अवसर है, लेकिन बिना सावधानी के जुआ।

बलविंदर और राहुल जैसे अपराधी जेल की सलाखों के पीछे होंगे, लेकिन पीड़ितों के घाव? वे सालों तक भरेंगे। क्या आप तैयार हैं इस डिजिटल जंगल में स्मार्ट बनने के लिए? या फिर अगला शिकार बनने के लिए? सोचिए, रिसर्च कीजिए, और सुरक्षित रहि क्योंकि क्रिप्टो का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन सिर्फ सतर्क आंखों वालों के लिए।

 

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