नई दिल्ली, 11 नवंबर 2025। Delhi Red Fort Blast: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार शाम को हुए भयानक विस्फोट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास गेट नंबर 1 पर खड़ी एक हुंडई i20 कार में शाम 6:52 बजे धमाका हुआ, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
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दिल्ली पुलिस ने घटनास्थल पर तुरंत पहुंचकर एफआईआर दर्ज की, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत आतंकी साजिश, हत्या और विस्फोट से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। घटना के तुरंत बाद दिल्ली में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया, जबकि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों को हाई अलर्ट पर रखा गया।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि कार पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) के डॉक्टर उमर से जुड़ी थी, जो संदिग्ध के रूप में सामने आया है। वाहन की ट्रेसिंग से पता चला कि यह गुरुग्राम के मोहम्मद सलमान से देवेंद्र (ओखला), फिर अंबाला और अंततः तारिक (पुलवामा) के हाथों बिका। पुलिस ने पहले मालिक सलमान, कार बिक्री से जुड़े तीन लोगों, संदिग्ध के पिता गुलाम नबी भट्ट और फरीदाबाद के कुछ डॉक्टरों को हिरासत में लिया है।
डीएनए सैंपलिंग की गई है और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) तथा एनएसजी की रिपोर्ट का इंतजार है। सीसीटीवी फुटेज से संदिग्ध का अकेला होना पुष्टि हुई, जो दारियागंज की ओर जा रहा था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दो हाईलेवल मीटिंग्स की अध्यक्षता की। पहली बैठक उनके आवास पर सुबह 11 बजे और दूसरी गृह मंत्रालय में दोपहर 3 बजे हुई।
इसमें गृह सचिव गोविंद मोहन, आईबी निदेशक तपन, एनआईए महानिदेशक सदानंद वसंत दाते, दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा और जम्मू-कश्मीर डीजीपी नलिन प्रभात (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से) शामिल हुए। शाह ने पीएम मोदी से भी चर्चा की और लोक नायक अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “सभी संभावनाओं की जांच हो रही है।
साजिशकर्ताओं को बख्शा नहीं जाएगा।” मीटिंग के बाद सरकार ने जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी, जो अब मल्टी-एजेंसी प्रोब चला रही है। दिल्ली क्राइम ब्रांच और स्पेशल ब्रांच ने 10 मिनट में साइट सील कर ली थी।विपक्ष ने केंद्र पर सुरक्षा चूक का आरोप लगाया, लेकिन भाजपा ने इसे आतंकी साजिश बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। एनआईए की जांच से जल्द ही और खुलासे होने की उम्मीद है। यह घटना 2027 चुनावों से पहले दिल्ली की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
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