लखनऊ, 11 नवंबर 2025। AAP Padayatra: उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्य में अपने पहले बड़े जन संपर्क अभियान के रूप में सरयू नदी से प्रयागराज के संगम तक 180 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का ऐलान किया है। यह पदयात्रा 12 नवंबर से शुरू होकर 24 नवंबर तक चलेगी, जिसका नेतृत्व राज्यसभा सांसद संजय सिंह करेंगे।
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थीम ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ पर आधारित यह मार्च बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा और सामाजिक असमानता जैसे ज्वलंत मुद्दों को उजागर करेगा, तथा इसे एक जन आंदोलन में बदलने का लक्ष्य रखा गया है। संजय सिंह ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “उत्तर प्रदेश के युवा बेरोजगारी की चपेट में हैं, किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं और समाज में न्याय की कमी साफ नजर आ रही है।
यह पदयात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक क्रांति का प्रारंभ है। हम सरयू तट से अयोध्या से प्रस्थान करेंगे और प्रयागराज के पवित्र संगम पर समाप्ति करेंगे। रास्ते में हर गांव, हर शहर में लोगों से जुड़ेंगे और उनकी आवाज बनेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अभियान AAP की उत्तर प्रदेश में मजबूत उपस्थिति दर्ज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पार्टी ने पहले ही 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है, और यह पदयात्रा उसकी तैयारी का हिस्सा है।
पदयात्रा का मार्ग अयोध्या से शुरू होकर फैजाबाद, सुल्तानपुर, जौनपुर और अंततः प्रयागराज तक फैला होगा। दैनिक 15-20 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए यात्रा में स्थानीय कार्यकर्ता, युवा, किसान और महिलाएं शामिल होंगी। AAP के प्रदेश प्रभारी संजय सिंह के अलावा अन्य वरिष्ठ नेता भी इसमें भाग लेंगे। पार्टी का दावा है कि यह मार्च न केवल मुद्दों को उठाएगा, बल्कि लोगों को दिल्ली मॉडल की तरह सस्ती शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की गारंटी का संदेश देगा।
इस बीच, विपक्षी दलों ने इसकी आलोचना शुरू कर दी है। भाजपा ने इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ करार दिया, जबकि सपा ने कहा कि AAP को पहले अपनी दिल्ली सरकार पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन AAP कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। एक कार्यकर्ता ने बताया, “यह यात्रा भगवान राम की जन्मभूमि से शुरू होकर त्रिवेणी संगम पर समाप्त होगी, जो प्रतीकात्मक रूप से न्याय की मांग को मजबूत बनाएगी।”
यह पदयात्रा उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए। AAP की यह पहल युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में पैठ बनाने का प्रयास है, जहां बेरोजगारी दर 20 प्रतिशत से ऊपर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सफल रही, तो पार्टी का वोट बैंक मजबूत हो सकता है। कुल मिलाकर, यह 13 दिनों की यात्रा न केवल शारीरिक चुनौती होगी, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी बनेगी।
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