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‘त्रिशूल’ अभ्यास खत्म: 30,000 जवान, 40+ विमान के साथ भारत ने दिखाई ताकत, सूखी दुश्मन की हलक

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'त्रिशूल' अभ्यास खत्म

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नई दिल्ली, 10 नवंबर 2025। भारतीय सेनाओं ने ‘आन-बान-शान’ के अटल संकल्प के साथ त्रि-सेवा अभ्यास ‘त्रिशूल’ (TSE-2025) का सफल समापन कर लिया। 3 से 7 नवंबर तक चले इस पांच दिवसीय मेगा ऑपरेशन में 30,000 से अधिक जवान, 40 से ज्यादा विमान, 20-25 नौसेना के सतह एवं पनडुब्बी प्लेटफॉर्म और अनगिनत जमीनी हथियार शामिल हुए। राजस्थान के थार रेगिस्तान से गुजरात के कच्छ तक फैला यह अभ्यास दक्षिणी कमांड के ‘मारूज्वाला’ और ‘अखंड प्रहार’ ड्रिल्स का हिस्सा था, जिसने बहु-क्षेत्रीय युद्धक्षमता को परखा।

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भारतीय नौसेना के नेतृत्व में सेना और वायुसेना के साथ समन्वय से आयोजित यह ड्रिल दुश्मन सीमाओं पर साफ संदेश देती है कि भारत की एकजुट ताकत किसी आक्रामकता को कुचल देगी। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य संयुक्त मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को मजबूत करना, बहु-क्षेत्रीय एकीकरण को सत्यापित करना और ‘जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता एवं इनोवेशन’ (JAI) को साकार करना था। थार रैप्टर ब्रिगेड के विमान, सुदर्शन चक्र और कोणार्क कोर की मैकेनाइज्ड इकाइयों ने उच्च गति वाले संयुक्त हथियार अभियानों का प्रदर्शन किया।

'त्रिशूल' अभ्यास खत्म

नौसेना के एम्फीबियस प्लेटफॉर्म ने सौराष्ट्र तट पर संयुक्त एम्फीबियस ऑपरेशन का समापन किया, जहां बीच लैंडिंग और हवाई हमलों का सिमुलेशन दुश्मन को भयभीत करने वाला था। भारतीय तटरक्षक बल (ICG), बीएसएफ और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की भागीदारी ने अंतर-एजेंसी समन्वय को नई ऊंचाई दी। यह अभ्यास ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास था, जिसमें पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने के बाद भारत-पाक तनाव चरम पर था।

रावलपिंडी में बैठे तत्वों की हलक सूख गई, क्योंकि ‘त्रिशूल’ ने पारंपरिक, इलेक्ट्रॉनिक और साइबर युद्ध की हाइब्रिड क्षमताओं का प्रदर्शन किया। स्वदेशी हथियार प्रणालियों जैसे ब्रह्मोस मिसाइल, तेजस विमान और आकाश एयर डिफेंस का भरपूर उपयोग आत्मनिर्भर भारत की ताकत झलकाता है। रक्षा मंत्रालय ने कहा, “यह अभ्यास आधुनिक हाइब्रिड युद्ध के लिए भारत की तत्परता का प्रमाण है।”

'त्रिशूल' अभ्यास खत्म

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘त्रिशूल’ ने न केवल आंतरिक समन्वय मजबूत किया, बल्कि पड़ोसी देशों को चेतावनी भी दी। दक्षिणी कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. मेहरा ने कहा, “यह जॉइंटनेस का प्रतीक है, जो दुश्मन को सोचने पर मजबूर करेगा।” अभ्यास में शामिल जवानों ने ‘आन-बान-शान’ का जाप करते हुए देशभक्ति का अनुपम प्रदर्शन किया। आने वाले समय में ऐसे अभ्यास भारत की रक्षा रणनीति को और सशक्त बनाएंगे, जहां हर सैनिक का जज्बा दुश्मन की नींद उड़ा दे। यह न केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन था, बल्कि राष्ट्र की एकता का भी।

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