लखनऊ, 9 नवंबर 2025। Drug Racket: उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप का अवैध कारोबार चरम पर पहुंच गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हाल के दिनों में करोड़ों रुपये कीमत की जब्ती हुई है, जो इस संगठित गिरोह की पहुंच को उजागर करती है। यह नशे का कारोबार न केवल राज्य के कोने-कोने में फैला है, बल्कि नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों तक सिरप की सप्लाई हो रही है।
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युवाओं और किशोरों में नशे की लत को बढ़ावा देने वाला यह जाल स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रहा है, जैसा कि मध्य प्रदेश में बच्चों की मौतों से सिद्ध हुआ। FSDA ने 12 अक्टूबर को 30 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें गाजीपुर, कानपुर, बरेली, आगरा और लखनऊ शामिल थे। लखनऊ के स्नेह नगर में 3 लाख रुपये कीमत के संदिग्ध कोडीन सिरप जब्त हुए, और मुख्य आरोपी दीपक मैनवानी को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में मैनवानी ने खुलासा किया कि वह गुजरात, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से सिरप मंगवाता था, स्थानीय स्तर पर ऊंची कीमत पर बेचता था।
वह महराजगंज, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर के रास्ते नेपाल और बांग्लादेश में तस्करी करवाता था। उसके सहयोगी सूरज कुमार मिश्रा और मोंटी सरदार भी गिरफ्तारी की जद में हैं। गाजियाबाद में हाल की सबसे बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने 1 लाख से अधिक बोतलें (4 करोड़ रुपये कीमत) जब्त कीं, साथ ही 20 लाख नकद और एक एसयूवी बरामद हुई। सात आरोपी गिरफ्तार, जिनमें मुख्य सौरभ त्यागी (आरएस फार्मा का मालिक) शामिल हैं।
सिरप दिल्ली की एक कंपनी से नकली नामों पर मंगाया जाता था, गाजियाबाद के गोदाम में छिपाया जाता, और चूना, सीमेंट व सड़े चावल के बोरे में लपेटकर पूर्वी राज्यों (यूपी, बिहार, झारखंड, बंगाल) भेजा जाता। वहां से बांग्लादेश में तस्करी होती। मेरठ के आसिफ-वासिम और वाराणसी के शुभम जायसवाल जैसे लोग विदेशी खरीदारों से संपर्क रखते थे।
सोनभद्र में 18 अक्टूबर को 1.19 लाख बोतलें (3 करोड़ रुपये) जब्त हुईं, जो गाजियाबाद से झारखंड जा रही थीं। तीन आरोपी हेमंत पाल, ब्रजमोहन शिवहरे और रामगोपाल धाकड़ (मध्य प्रदेश के) चिप्स के कार्टन में सिरप छिपा रहे थे। एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज।
यह कारोबार फर्जी ई-वे बिलों पर चलता है और सिरप की कीमत बाजार से दोगुनी होती है। यूपी में ऐसे सिरप प्रतिबंधित हैं, लेकिन तस्करी रुक नहीं रही। फ़िलहाल, FSDA और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने संयुक्त अभियान तेज कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कैंप लगाए जा रहे। यदि यह जाल न रुका, तो स्वास्थ्य संकट गहरा सकता है।








