नई दिल्ली, 8 नवंबर 2025। Delhi Fire: दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी इलाके रोहिणी में रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास शुक्रवार रात करीब 10:56 बजे एक भयंकर आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। यह आग इतनी तेजी से फैली कि देखते-देखते 400-500 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं, जिससे करीब 5 एकड़ क्षेत्र तबाह हो गया। आसपास जमा प्लास्टिक कबाड़ ने आग को और भड़काया, हालांकि सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या कबाड़ से निकली चिंगारी का संदेह जताया जा रहा है।
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इस दुखद हादसे में एक 30 वर्षीय युवक मुन्ना की जिंदगी आग की लपटों में समा गई। वह आग बुझाने के प्रयास में फंस गया और मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, एक अन्य निवासी राजेश (30 वर्ष) गंभीर रूप से झुलस गया, जिसका इलाज सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। झुग्गीवासियों में अफरा-तफरी मच गई। रात के सन्नाटे में आग की लपटें दिखते ही लोग चीखते-चिल्लाते सड़क पर भागे।

महिलाएं और बच्चे जान बचाने को बेताब हो गए, कई परिवार पूरी तरह बेघर हो गए। अनुमान है कि 200-300 लोग प्रभावित हुए हैं। दमकल विभाग ने तुरंत संकट मोड में काम शुरू किया। शुरुआत में असिस्टेंट डायरेक्टर ए.के. शर्मा के नेतृत्व में दो वॉटर टेंडर और तीन वॉटर बॉजर पहुंचे, लेकिन आग की तीव्रता देख मध्यम अलर्ट जारी कर दिया गया। कुल 24 दमकल वाहन रात भर जुटे रहे, जिनमें 7 वॉटर टेंडर, 12 वॉटर बॉजर, 2 फोम टेंडर, 1 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, 1 इंटरनल रेस्क्यू टेंडर, 2 मल्टी-पर्पस वाहन, 2 मिनी रोबोट और 1 बड़ा रोबोट शामिल थे।
डीसीएफओ एस.के. दुआ समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे रहे। पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड, कैट्स एम्बुलेंस जैसी एजेंसियों ने भी बचाव में योगदान दिया। रातभर की मशक्कत के बाद शनिवार तड़के करीब 5 बजे आग पर काबू पा लिया गया, हालांकि कुछ दमकलकर्मी भी मामूली रूप से घायल हो गए। झुग्गीवासी बताते हैं कि वे सोते समय आग की चमक देखकर जागे, लेकिन तब तक सब कुछ जल चुका था। बच्चे-महिलाएं सड़क पर ही रात काटने को मजबूर हो गए।
डीसीपी रोहिणी ने बताया कि प्रशासन ने तत्काल राहत पहुंचाई खाने-पीने का सामान, पानी और अस्थायी शेल्टर की व्यवस्था की गई। यह इलाका पहले भी आग की घटनाओं का शिकार रह चुका है, लेकिन इस बार नुकसान अभूतपूर्व है। स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा उपायों की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराए। यह घटना दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में सुरक्षा की पोल खोलती है, जहां गरीबी और घनी आबादी जोखिम को बढ़ाती है।
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