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Bihar Elections 2025: बिहार चुनाव में दागी उम्मीदवारों की बाढ़, सिवान में सबसे ज्यादा 32 नेता चुनाव मैदान में 

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Bihar Elections 2025

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पटना, 3 नवंबर 2025। Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों का बोलबाला है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि 121 सीटों पर कुल 1303 उम्मीदवारों में से 423 (32%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

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इनमें 354 (27%) पर गंभीर अपराधों जैसे हत्या, बलात्कार प्रयास और अपराधीकरण के केस दर्ज हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 91 सीटें (75%) ‘रेड अलर्ट’ वाली हैं, जहां तीन या इससे अधिक दागी उम्मीदवार मैदान में हैं। यह आंकड़ा बिहार की राजनीति में अपराधीकरण की गहरी जड़ों को उजागर करता है। जिला-वार विश्लेषण में सिवान सबसे ऊपर है, जहां 32 दागी उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

यह जिला लंबे समय से अपराध और राजनीति के गठजोड़ के लिए कुख्यात रहा है। पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन जैसे नामों की छाया अभी भी यहां मंडरा रही है। सिवान की आठ विधानसभा सीटों सीवान, जिरादेई, दरौली, रघुनाथपुर, दारौंधा, बड़हरिया, गोरियाक और महाराजगंज में से कई पर दागी प्रत्याशी प्रमुख दलों से टिकट काटकर उतर आए हैं। दूसरे नंबर पर पटना और सारण जिले हैं, जहां प्रत्येक में 31-31 दागी उम्मीदवार हैं।

पटना, राजधानी होने के बावजूद अपराध की चपेट में है, जबकि सारण में जातिगत हिंसा और अपराध के पुराने मामले सुर्खियां बटोरते रहे हैं। तीसरे स्थान पर मुजफ्फरपुर और दरभंगा हैं, जहां 29-29 उम्मीदवारों के खिलाफ केस हैं। मुजफ्फरपुर की कुढ़नी सीट पर तो सबसे अधिक दागी प्रत्याशी मैदान में हैं। दल-वार आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। महागठबंधन के घटकों में अपराधीकरण की दर एनडीए से कहीं अधिक है।

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के 70 उम्मीदवारों में 53 (76%) दागी हैं, जिनमें 42 पर गंभीर केस। भाकपा-माले के 14 में 13 (93%) और कांग्रेस के 48 में 31 (65%) दागी। वहीं, भाजपा के 23 में 15 (65%) और जेडीयू के 57 में 22 (39%) हैं। जन सुराज पार्टी के 114 में 50 (44%) दागी हैं। एडीआर के अनुसार, 33 उम्मीदवारों पर हत्या के आरोप हैं, जबकि दो पर बलात्कार के प्रयास के।

यह रिपोर्ट वोटरों के सामने सवाल खड़ी करती है क्या बिहार की जनता अपराधी नेताओं को फिर चुनकर सशक्तिकरण चाहती है? विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के बावजूद पार्टियां दागी उम्मीदवारों को टिकट दे रही हैं, क्योंकि वे ‘विनर’ साबित होते हैं। पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को है, लेकिन यह आंकड़ा लोकतंत्र की सेहत पर सवालिया निशान लगाता है।

बिहार को अपराधमुक्त राजनीति की जरूरत है, वरना विकास का सपना अधूरा रहेगा। क्या वोटर जागेंगे या पुरानी प्रथा जारी रखेंगे? आने वाले चरणों में भी यही ट्रेंड बरकरार रहेगा, तो सुधार की गुंजाइश कम हो जाएगी।

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