नोएडा, 23 अक्टूबर 2025। PF-ESIC Scam: नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां फैक्ट्री मालिकों ने कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) के लाभ से वंचित करने के लिए चालाकी भरी चाल चली है। सैकड़ों फैक्ट्रियों को ‘दुकान’ का रूप देकर वे कानूनी जाल से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे हजारों मजदूरों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
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नई दिल्ली विकास प्राधिकरण (नोएडा अथॉरिटी) ने इस उल्लंघन पर सख्ती दिखाते हुए 210 फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी कर दिए हैं। इन नोटिसों में 15 दिनों के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है, वरना जुर्माना और सीलिंग की कार्रवाई होगी। यह मामला नोएडा के सेक्टर 2, 4, 10 और 63 जैसे प्रमुख औद्योगिक जोनों में फैला हुआ है, जहां छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी हैं।
नियमों के अनुसार, 10 से अधिक कर्मचारियों वाली इकाइयों पर PF और ESIC अनिवार्य है, जो कर्मचारियों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना कवरेज प्रदान करती हैं, लेकिन संचालक PF-ESIC योगदान से बचने के लिए अपनी यूनिट्स को ‘शॉप’ या ‘ट्रेडिंग हाउस’ बता रहे हैं। इससे नियोक्ता को 12% PF और 3.25% ESIC का बोझ नहीं उठाना पड़ता, जबकि कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा के काम करने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों पर हमला भी। अथॉरिटी की जांच में पाया गया कि कई संचालक लाइसेंस में बदलाव कराकर उत्पादन इकाई को खुदरा दुकान दिखा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, सेक्टर 10 की एक टेक्सटाइल फैक्ट्री को ‘फैब्रिक शॉप’ बता दिया गया, जहां 50 से अधिक मजदूर सिलाई-कढ़ाई का काम कर रहे थे। इसी तरह, सेक्टर 63 में इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली यूनिट को ‘रिपेयर शॉप’ का नाम दे दिया।
इन धोखाधड़ी से संचालकों को लाखों रुपये की बचत हो रही है, लेकिन कर्मचारियों को चिकित्सा खर्च, पेंशन और मातृत्व लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। एक प्रभावित मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम दिन-रात काम करते हैं, लेकिन बीमार पड़ने पर इलाज का खर्च खुद उठाते हैं। PF का नामोनिशान नहीं। “नोएडा अथॉरिटी के प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई श्रम विभाग और EPFO-ESIC के साथ समन्वय में की गई है। अब तक 50 से अधिक यूनिट्स का सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गईं।
नोटिस प्राप्त संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे तत्काल PF-ESIC पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं और बकाया जमा करें। गैर-अनुपालन पर 50,000 से 5 लाख तक जुर्माना और परिसर सील करने की चेतावनी दी गई है। अथॉरिटी ने सभी औद्योगिक यूनिट्स से अपील की है कि वे पारदर्शी रहें, वरना बड़े पैमाने पर छापेमारी होगी। यह घटना नोएडा जैसे औद्योगिक हब में श्रमिक कल्याण की स्थिति पर सवाल खड़े करती है।
सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत मजदूरों को मजबूत सुरक्षा कवच देने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत उलट है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि डिजिटल मॉनिटरिंग और रैंडम ऑडिट से ऐसी धांधली रोकी जा सकती है। यदि समय रहते सुधार न हुए, तो हजारों परिवारों का भविष्य दांव पर लग सकता है। अथॉरिटी की इस पहल से उम्मीद है कि कर्मचारियों के हक की रक्षा होगी और संचालक कानून का पालन करेंगे।
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