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Elvish Yadav: एल्विश पर ED का शिकंजा, इस केस में दाखिल की चार्जशीट

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Elvish Yadav

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मुंबई, 16 अक्टूबर 2025। Elvish Yadav: प्रसिद्ध यूट्यूबर एल्विश यादव और लोकप्रिय सिंगर फाजिलपुरिया (असली नाम राहुल यादव) मुश्किलों के घेरे में फंस गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को दिल्ली की विशेष अदालत में दोनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चार्जशीट दाखिल की।

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यह मामला उनके यूट्यूब वीडियोज में संरक्षित वन्यजीव प्रजातियों जैसे सांपों और इग्वाना के इस्तेमाल से जुड़ा है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। ED का दावा है कि इन वीडियोज से होने वाली कमाई को अपराध की आय (POC) माना जाए, जिसे दोनों ने लॉन्डर किया। चार्जशीट के अनुसार, फाजिलपुरिया ने इन अवैध गतिविधियों से उत्पन्न धन को उत्पन्न, अर्जित, कब्जे में रखा और इस्तेमाल किया।

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एक वीडियो के उत्पादन में ही इसका हिस्सा खर्च हुआ, जो अपराध को छिपाने का प्रयास था। वहीं, एल्विश यादव के एक व्लॉग ने ₹84,000 की कमाई की, जो ED ने जब्त कर ली। इसके अलावा, एल्विश ने यूट्यूब से कुल ₹25 लाख कमाए, जिनसे बिजनौर में 3 एकड़ कृषि भूमि खरीदी गई। यह संपत्ति भी जब्त हो चुकी है, साथ ही ₹3 लाख नकद। ED ने पाया कि ये वीडियोज न केवल वन्यजीवों का शोषण करते हैं, बल्कि उनकी कमाई से दोनों ने लग्जरी लाइफस्टाइल अपनाई।

यह केस नवंबर 2023 से चल रहा है, जब नोएडा पुलिस ने सांपों के जहर रेव पार्टियों के आरोप में एल्विश को गिरफ्तार किया था। IFS अधिकारी गौरव गुप्ता की शिकायत पर CBI ने FIR दर्ज की, जो ED को ट्रांसफर हो गई। ED ने छापेमारी में सबूत जुटाए, जिसमें वीडियोज के वायरल होने और व्यूज से कमाई के रिकॉर्ड शामिल हैं। चार्जशीट में दोनों को आरोपी बनाया गया है, और अदालत ने सुनवाई की तारीख तय कर दी है।

एल्विश के वकील ने इसे राजनीतिक साजिश बताया, लेकिन ED का कहना है कि सबूत अकाट्य हैं। सेलिब्रिटी जगत में यह खबर तहलका मचा रही है। एल्विश, जो बिग बॉस ओटीटी-2 के विनर हैं, के 12 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं, जबकि फाजिलपुरिया की हार्डकोर रैप गाने युवाओं में छाए हैं। दोनों ने सोशल मीडिया पर सफाई दी, लेकिन ED की कार्रवाई से उनके प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक लग सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए चेतावनी है कंटेंट क्रिएशन के नाम पर कानून तोड़ना महंगा पड़ सकता है। वन्यजीव कार्यकर्ता इसे सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जो संरक्षण को मजबूत करेगा। क्या एल्विश और फाजिलपुरिया बच पाएंगे? अदालत का फैसला इंतजार कर रहा है, लेकिन उनकी छवि पर दाग लग चुका है।

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