नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2025। भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार जसप्रीत बुमराह को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज माना जाता है। वह टीम इंडिया के लिए मैन-टू-मैन विकेट लेने वाले योद्धा हैं। चाहे कोई भी पिच हो या परिस्थिति, बुमराह का एक ओवर बाकी होने पर ही विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बन जाता है। 31 वर्षीय बुमराह का फॉर्म हाल के महीनों में थोड़ा नीचे आया है, लेकिन वे अभी भी भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के कप्तान बने हुए हैं।
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गुजरात प्रीमियर लीग (जीपीएल) में उनके साथ खेल चुके पूर्व टीममेट मनप्रीत जुनेजा ने बुमराह की तुलना टेनिस के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर से की है। जुनेजा ने उनकी मानसिक मजबूती और लगातार सुधार की भूख की सराहना की, जो वर्कलोड मैनेजमेंट की बहस के बीच एक मजबूत बचाव साबित हो रही है।जुनेजा, जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 45 की औसत से 4000 से अधिक रन बना चुके हैं, ने बुमराह की मानसिक दृढ़ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “बुमराह मानसिक रूप से बेहद मजबूत हैं। जब भी वे फॉर्म के लो में होते हैं, वे और मजबूती से वापसी करना चाहते हैं।

शुरुआती दिनों में भी वे ऐसे ही थे और आज भी वही जज्बा दिखाते हैं। मेरे लिए, वे ठीक वैसा ही हैं जैसे 30 साल की उम्र के बाद रोजर फेडरर टेनिस कोर्ट पर थे। फेडरर ने 36 साल की उम्र में भी ग्रैंड स्लैम जीतकर दुनिया को दिखा दिया कि उम्र सिर्फ आंकड़ा है। बुमराह भी उसी तरह की लगन और जुनून के साथ खेलते हैं।” यह तुलना इसलिए खास है क्योंकि फेडरर ने करियर के अंतिम वर्षों में भी अपनी फिटनेस और तकनीक को निखारकर रिकॉर्ड बनाए थे, ठीक वैसे ही जैसे बुमराह चोटों के बावजूद वापसी कर रहे हैं।
तेज गेंदबाज होने के नाते उनके शरीर पर भारी दबाव पड़ता है, जिसके कारण उन्हें स्मार्ट तरीके से मैच चुनने पड़ते हैं। वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर विशेषज्ञों और फैंस में बहस छिड़ी हुई है क्या उन्हें तीनों फॉर्मेट में खेलना चाहिए या आराम दिया जाए? जुनेजा ने इसकी पैरवी करते हुए कहा, “लोग भूल जाते हैं कि 32 साल की उम्र में एक तेज गेंदबाज के लिए टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों में खेलना आसान नहीं होता। अगर लंबे समय तक करियर चलाना है, तो स्मार्ट बनना जरूरी है। अपने शरीर को समझना और उसे मैनेज करना सीखना पड़ता है। जब कोई खिलाड़ी ऐसा करता है, तो मुझे समझ नहीं आता कि इसमें क्या समस्या है? बुमराह का यह अप्रोच ही उन्हें लंबे समय तक टॉप पर रखेगा।
उन्होंने बताया, “वे एक परिपक्व और समझदार इंसान हैं, जो हमेशा टीम के हित को सर्वोपरि रखते हैं। चाहे प्रैक्टिस हो या मैच, वे साथियों को प्रेरित करते रहते हैं।” बुमराह ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया था, जहां उन्होंने विकेटों का जाल बिछाया। लेकिन चोट के कारण उन्हें कुछ सीरीज से बाहर होना पड़ा, जिससे वर्कलोड बहस तेज हो गई।
पूर्व कोचों का मानना है कि बुमराह जैसे गेंदबाजों को रोटेशन पॉलिसी अपनानी चाहिए, ताकि वे 2027 वर्ल्ड कप तक फिट रहें। यह तुलना न केवल बुमराह के व्यक्तिगत संघर्ष को रेखांकित करती है, बल्कि भारतीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजों की चुनौतियों को भी उजागर करती है। जुनेजा की यह बात साफ संदेश देती है कि बुमराह का जुनून और बुद्धिमत्ता उन्हें फेडरर की तरह अमर बना देगी। फैंस को उम्मीद है कि बुमराह जल्द ही पूर्ण फॉर्म में लौटेंगे और टीम को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
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