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Bareilly Violence: तौकीर रजा के करीबियों पर बुलडोजर एक्शन शुरू, रजा पैलेस ध्वस्त

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बरेली, 4 अक्टूबर 2025। Bareilly Violence:बरेली, 4 अक्टूबर 2025। Bareilly Violence: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं के बाद प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। 26 सितंबर को ‘आई लव मुहम्मद’ अभियान से जुड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें मौलाना तौकीर रजा खान के कई करीबी सहयोगी शामिल हैं।

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पुलिस ने इन प्रदर्शनों के दौरान पेट्रोल बम और अन्य ज्वलनशील सामग्री बरामद की, जिसके बाद अवैध निर्माणों पर बुलडोजर एक्शन तेज हो गया। सबसे बड़ा झटका मौलाना तौकीर रजा के दामाद मोहसिन रजा को लगा, जिनकी संपत्ति पर प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। मंगलवार को बरेली प्रशासन ने मोहसिन रजा के स्वामित्व वाले रजा पैलेस को बुलडोजर से नेस्तनाबूद कर दिया। यह पैलेस शहर के एक प्रमुख इलाके में स्थित था, जहां अवैध निर्माण का आरोप था।

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जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर चली इस कार्रवाई में भारी पुलिस बल, रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स (आरआरएफ) और ड्रोन निगरानी का सहारा लिया गया। मोहसिन रजा, जो बरेली सिटी काउंसलर भी हैं, को प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी एक गैरेज, जो नाले के ऊपर अतिक्रमण करके बनाई गई थी, को भी ध्वस्त कर दिया गया। इसके अलावा, उनके रिसॉर्ट को सील कर दिया गया है।

प्रशासन का कहना है कि ये कार्रवाइयां अवैध कब्जे हटाने के लिए हैं, न कि किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते। बरेली के डीएम अरविंद कुमार ने बताया कि तौकीर रजा के सहयोगियों से जुड़ी आठ अवैध संपत्तियों की पहचान की गई है, जिन पर जल्द ही बुलडोजर चलेगा। इनमें बाजार, दुकानें और आवासीय भवन शामिल हैं। हाल ही में तौकीर रजा से जुड़े एक बाजार को सील किया गया, जबकि 40 से अधिक अवैध दुकानों पर भी कार्रवाई हुई। यह अभियान योगी आदित्यनाथ सरकार की ‘बुलडोजर नीति’ का हिस्सा माना जा रहा है, जो अपराधियों और अवैध निर्माणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर जोर देती है।

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विपक्षी दलों ने इसे ‘सामूहिक सजा’ करार दिया है, जबकि भाजपा ने इसे कानून का राज स्थापित करने का कदम बताया। हिंसा की इस घटना में दो पुलिसकर्मी घायल हुए थे, और शहर में तनाव की स्थिति बनी रही। मौलाना तौकीर रजा, जो बरेली शरीफ के प्रमुख धार्मिक नेता हैं, ने प्रदर्शनों का समर्थन किया था, जिसके बाद उनके करीबियों पर निशाना साधा गया। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह कार्रवाई शांति बहाली के लिए जरूरी है, लेकिन कुछ समुदायों में असंतोष भी व्याप्त है।

प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि निर्दोषों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा, और कार्रवाई केवल कानूनी आधार पर होगी। बरेली में अब शांति बहाली के प्रयास तेज हैं, लेकिन राजनीतिक बहस गरमाती जा रही है। यह घटना उत्तर प्रदेश में धार्मिक संवेदनशीलता और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन की चुनौतियों को उजागर करती है।

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