गाजियाबाद, 27 सितंबर 2025। Cyber Fraud: साइबर अपराधियों की शातिर चालों ने एक बार फिर बुजुर्गों के जीवन को उजाड़ दिया है। यहां इंदिरापुरम क्षेत्र में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने का डर दिखाकर 8 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। ठगों ने न केवल 20 लाख रुपये ऐंठ लिए, बल्कि दंपती को इतना परेशान किया कि उन्होंने अपना घर तक बेचना पड़ा। यह घटना साइबर क्राइम की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करती है, जहां बुजुर्ग सबसे आसान शिकार बन रहे हैं।
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पुलिस के अनुसार, पीड़ित दंपती, 70 वर्षीय रामलाल और उनकी 68 वर्षीय पत्नी सीता देवी, रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं। वे शांतिपूर्ण जीवन जी रहे थे, लेकिन 15 सितंबर को एक अज्ञात नंबर से कॉल ने उनकी दुनिया उलट-पुलट कर दी। कॉलर ने खुद को दूरसंचार विभाग की अधिकारी ‘पूजा शर्मा’ बताया और कहा कि दंपती के आधार कार्ड से जुड़े बैंक खाते में अवैध लेन-देन हुआ है। ‘आपके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हो चुका है। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और सीबीआई आपको गिरफ्तार करने आ रही है।’ यह डरावनी बात सुनते ही दंपती घबरा गए। ठगों ने तुरंत वीडियो कॉल पर दंपती को ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोषित कर दिया।
उन्होंने फर्जी दस्तावेज भेजे, गिरफ्तारी वारंट, सुप्रीम कोर्ट की याचिका और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े नोटिस। दंपती को घर से बाहर न निकलने, मोबाइल कैमरा 24 घंटे चालू रखने और किसी से बात न करने का आदेश दिया गया। अगले दिन, ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस के एसीपी ‘राहुल गुप्ता’ और सीबीआई अधिकारी ‘अनिल वर्मा’ बताकर कॉल की। उन्होंने धमकाया, ‘अगर जमानत न ली तो आपकी सारी संपत्ति जब्त हो जाएगी और परिवार को भी नुकसान पहुंचेगा।’ दंपती ने डर के मारे सहमति दे दी। ठगों ने ‘अग्रिम जमानत’ के नाम पर पहले 5 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा। दंपती ने अपनी सेविंग्स से पैसे भेज दिए। फिर, ‘कोर्ट फीस’ और ‘वेरिफिकेशन चार्ज’ के बहाने रकम बढ़ती गई—कुल 20 लाख तक। जब बैंक बैलेंस खत्म हो गया, तो ठगों ने एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) तोड़ने का दबाव डाला।
दंपती ने बैंक जाकर 10 लाख की एफडी भंग की। बाकी राशि के लिए उन्होंने अपना छोटा-सा घर गिरवी रख दिया और सोने के आभूषण बेचे, लेकिन ठगों की भूख मिटने का नाम न ले। आखिरकार, 23 सितंबर को 8वें दिन, जब दंपती ने अतिरिक्त पैसे मांगे, तो ठगों ने कॉल काट दिया। घर लौटकर दंपती को होश आया कि यह सब फर्जी था। पड़ोसियों की मदद से उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। इंस्पेक्टर ने बताया, ‘हमने केस दर्ज कर लिया है। ठगों के दिए खाते ट्रेस किए जा रहे हैं। दिल्ली-मुंबई लिंक संदिग्ध लग रहा है।’ जांच में पता चला कि ठगों ने व्हाट्सऐप और वीडियो कॉल का इस्तेमाल कर दंपती को पूरी तरह कंट्रोल में रखा था।
दंपती अब आर्थिक संकट में हैं घर बेचने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे उन्हें किराए का घर ढूंढना पड़ेगा। यह घटना साइबर फ्रॉड की भयावहता दर्शाती है। गाजियाबाद में पिछले तीन महीनों में डिजिटल अरेस्ट के 25 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं, जिनमें 5 करोड़ से अधिक की ठगी हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों को जागरूक करने की जरूरत है। पुलिस ने सलाह दी अज्ञात कॉल पर घबराएं नहीं, नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें।
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