लखनऊ, 23 सितंबर 2025। JPNIC: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) एक बार फिर सुर्खियों में है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का यह महत्वाकांक्षी ड्रीम प्रोजेक्ट, जो 2013 में शुरू हुआ था, अब योगी सरकार के नए फैसले से नया मोड़ ले रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपे जाने के बाद अब इसकी कमान प्राइवेट कंपनी को सौंपने की तैयारी जोरों पर है।
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प्रस्तावित योजना के तहत, इस बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स को सालाना 10 करोड़ रुपये की लीज पर निजी क्षेत्र को दिया जा सकता है, जिससे राज्य सरकार को राजस्व प्राप्त होगा और प्रोजेक्ट को पूरा करने में गति आएगी। JPNIC की कहानी समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के दौर से जुड़ी है। 2012 में सत्ता संभालते ही अखिलेश यादव ने गोमती नगर के 18 एकड़ क्षेत्र में दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर की तर्ज पर इस वर्ल्ड क्लास सुविधा का निर्माण शुरू कराया। प्रस्तावित लागत 265 करोड़ रुपये थी, लेकिन रिविजन के बाद यह 821 करोड़ तक पहुंच गई।

17 मंजिला यह इमारत सम्मेलनों, सभागारों, इनडोर गेम्स, 100 कमरों वाले गेस्ट हाउस, स्विमिंग पूल, ओपन एयर रेस्तरां और 750 वाहनों की पार्किंग जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस होनी थी। शालीमार रियल एस्टेट जैसी कंपनियों ने इसका निर्माण किया, लेकिन 2016 तक 80-90 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद यह अधर में लटक गया। 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनते ही प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गया। जांच में अनियमितताएं पाई गईं, और JPNIC सोसाइटी को भंग कर दिया गया।
पिछले आठ वर्षों से यह इमारत जंग खा रही है, जबकि करदाताओं का 821 करोड़ का खर्च व्यर्थ होता नजर आ रहा है। सपा नेता अखिलेश यादव ने कई बार इसे जीवंत करने की मांग की। 2023 में जेपी जयंती पर वे गेट फांदकर अंदर घुसे, तो 2024 में टिन शेड लगवाकर रोक दिया गया। अखिलेश ने इसे ‘बेचने की साजिश’ करार दिया, जबकि सरकार ने इसे ‘अनियमितता की जांच’ बताया।जुलाई 2025 में कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। JPNIC को LDA के हवाले कर दिया गया, साथ ही 821 करोड़ का कर्ज 30 साल में चुकाने का बोझ भी सौंपा।
LDA ने 50 करोड़ का बजट प्राप्त कर बचे काम शुरू करने की योजना बनाई। अब, सितंबर में नई रिपोर्ट्स से पता चला है कि LDA एक कमेटी गठित कर रहा है, जिसमें वित्त विशेषज्ञ और सलाहकार शामिल होंगे। यह कमेटी PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर काम करेगी। प्राइवेट कंपनी को लीज पर देकर संचालन सौंपा जाएगा, जिसमें सालाना 10 करोड़ की फीस तय की गई है। इससे LDA को राजस्व मिलेगा, और सेंटर 1.5 साल में चालू हो सकेगा। क्लब मेंबरशिप और कमर्शियल स्पेस भी विकसित होंगे। यह फैसला राजनीतिक हलचल मचा रहा है।
सपा इसे ‘ड्रीम प्रोजेक्ट की लूट’ बता रही है, जबकि भाजपा इसे ‘विकास की दिशा में कदम’ कह रही। अखिलेश ने सोशल मीडिया पर तंज कसा, ‘जेपी का सम्मान भाजपा राज में कैद हो गया।’ वहीं, LDA अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट से रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, JPNIC अब निजी हाथों में सौंपे जाने की कगार पर है, जो लखनऊ के स्काईलाइन को नया आयाम दे सकता है। लेकिन क्या यह अखिलेश का सपना पूरा करेगा या नया विवाद खड़े करेगा? समय ही बताएगा।
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