नई दिल्ली, 20 सितंबर 2025। Drainage Master Plan: दिल्ली की सड़कों पर हर मानसून में जलभराव की समस्या अब इतिहास बनने वाली है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शुक्रवार को दिल्ली के लिए एक महत्वाकांक्षी ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान 2025’ का शुभारंभ किया। यह 57,364 करोड़ रुपये का मेगा प्रोजेक्ट अगले 30 वर्षों तक राजधानी को बाढ़ और जलभराव से मुक्त रखने का वादा करता है।
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री परवेश साहिब सिंह की मौजूदगी में एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में लॉन्च हुए इस प्लान को ‘वाटरलॉगिंग मुक्त दिल्ली’ का गारंटी कार्ड बताया जा रहा है। दिल्ली का मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम 1976 का है, जब शहर की आबादी आज की तुलना में चार गुना कम थी। तब से बिना योजना के विकास, प्राकृतिक नालों पर अतिक्रमण, सीवेज और स्टॉर्म वॉटर का मिश्रण, तथा टुकड़ों में बनी निर्माण कार्यों ने समस्या को और गहरा दिया है।

शहर में करीब 18,958 किलोमीटर का ड्रेनेज नेटवर्क है, जो आठ विभिन्न एजेंसियों पीडब्ल्यूडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, एमसीडी, डीडीए, एनडीएमसी आदि के अधीन है। नया प्लान इन्हें एकीकृत करेगा और शहर को तीन मुख्य बेसिन नजफगढ़, बरापुल्लाह और ट्रांस-यमुना में विभाजित करेगा।इस प्लान की खासियतें सराहनीय हैं। वर्तमान में दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम प्रति घंटे 25 मिमी वर्षा को संभाल सकता है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 70 मिमी प्रति घंटे किया जाएगा। अगले तीन वर्षों में जलभराव की घटनाओं को 50 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य है।
50 साल बाद दिल्ली को मिला नया ड्रेनेज मास्टर प्लान वर्तमान जलभराव की समस्या का समाधान करेगा और दशकों के लिए राजधानी को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली देगा।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली को मिला यह उपहार जलभराव की… pic.twitter.com/tB0LCbJWv5
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) September 19, 2025
पांच वर्षों में बाढ़ से जुड़ी दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य जोखिमों में 30 प्रतिशत कमी, तथा चार वर्षों में आर्थिक नुकसान में 40 प्रतिशत कटौती सुनिश्चित होगी। नाले के आउटफॉल पर जल गुणवत्ता में 20 प्रतिशत सुधार भी लक्ष्य है। जहां गुरुत्वाकर्षण आधारित ड्रेन काम नहीं करेंगे, वहां नए पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। हरी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देते हुए रेन गार्डन, बायोस्वेल्स और पारगम्य पेवमेंट को नए प्रोजेक्ट्स के 10 प्रतिशत में शामिल किया जाएगा।
झीलों, वेटलैंड्स और ग्रीन पार्क्स को ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़कर वर्षा जल को अवशोषित किया जाएगा, जो भूजल रिचार्ज में मदद करेगा।कार्यान्वयन पांच चरणों में अगले पांच वर्षों में होगा, जिसमें पहले दो वर्षों में जलभराव हॉटस्पॉट्स पर फोकस रहेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “हमने सत्ता संभालते ही नालों का दौरा शुरू किया। पिछले मानसून में जलभराव कम हुआ, और अब दिल्ली पूरी तरह बाढ़ मुक्त होगी।”

उन्होंने पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 11 वर्षों में उन्होंने कोई अध्ययन नहीं किया। पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश वर्मा ने जोर दिया, “अब दिल्ली में कोई भी ड्रेनेज कार्य इस मास्टर प्लान पर आधारित होगा।” केंद्रीय मंत्री खट्टर ने इसे केंद्र-राज्य सहयोग का प्रतीक बताते हुए कहा, “यह योजना दिल्ली को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाएगी।”
यह प्लान दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों का भी पालन करता है, जो अप्रैल 2024 में प्लान की तत्काल जरूरत पर जोर दे चुका था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह न केवल जलभराव रोकेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ती चरम वर्षा के प्रति लचीलापन भी लाएगा। जल्द ही सीवर मास्टर प्लान और वाटर मास्टर प्लान भी लाए जाएंगे, जो समग्र जल प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे। दिल्लीवासियों के लिए यह राहत की सांस है, जो अब बिना चिंता के मानसून का स्वागत कर सकेंगे।
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