लखनऊ, 15 सितंबर 2025। Siyaram Murder Case: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में भाजपा कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय की रहस्यमयी मौत ने पूरे राज्य में सियासी हलचल मचा दी है। यह मामला सियाराम हत्याकांड के रूप में जाना जा रहा है, जहां कथित तौर पर स्थानीय पुलिस की पिटाई से उनकी मौत हो गई। घटना 10 सितंबर 2025 को नोनहरा थाना क्षेत्र के मेनहा गांव में घटी।
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सियाराम, जो एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता थे, को कुछ लोगों ने चोरी के संदेह में पकड़ लिया था। ग्रामीणों ने उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया, लेकिन थाने पहुंचने के बाद की घटनाएं चौंकाने वाली हैं। परिवार के अनुसार, सियाराम को थाने में बंद करने के बाद पुलिसकर्मियों ने उन पर बुरी तरह हमला किया। अगले दिन, 11 सितंबर को, सियाराम की हालत बिगड़ गई और उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर, छाती और अन्य अंगों पर गंभीर चोटें पाई गईं, जो पिटाई के निशान दर्शाती हैं। परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सियाराम को बेरहमी से पीटा, जिससे उनकी मौत हुई। यह घटना पुलिस हिरासत में मौत का मामला बन गया है, जो उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
सियासी आरोप-प्रत्यारोप
सियाराम उपाध्याय के परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी पत्नी ने बताया कि सियाराम एक मेहनती किसान और भाजपा के जिला स्तर के कार्यकर्ता थे, जो गांव में पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रहते थे। चोरी के झूठे आरोप में उन्हें फंसाया गया और थाने में यातनाएं दी गईं। परिवार ने कहा कि पुलिस ने घटना को छिपाने की कोशिश की और मौत को हार्ट अटैक बताने का प्रयास किया।
भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इसे पुलिस की बर्बरता का मामला बताते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि योगी सरकार में पुलिस का दुरुपयोग हो रहा है और कार्यकर्ताओं की जान जा रही है। वहीं, भाजपा ने इसे व्यक्तिगत घटना बताते हुए जांच की मांग की। गाजीपुर में सियाराम के शव को ले जाने के दौरान ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया, जिससे इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने लाठीचार्ज की धमकी देकर भीड़ को नियंत्रित किया। यह हत्याकांड न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि राजनीतिक माहौल को गर्म करने वाला साबित हो रहा है।
सीएम योगी का कड़ा रुख
घटना के खुलासे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया। 14 सितंबर 2025 को लखनऊ में भाजपा के गाजीपुर जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय, जिला प्रभारी डॉ. राकेश त्रिवेदी और पूर्व जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह के साथ बैठक की। करीब 30 मिनट चली इस बैठक में सीएम ने सियाराम की मौत के पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। तत्काल प्रभाव से नोनहरा थानाध्यक्ष सहित 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
योगी ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का आदेश जारी किया, जो घटना की निष्पक्ष जांच करेगी। SIT का नेतृत्व एक वरिष्ठ IPS अधिकारी करेंगे, और इसमें फॉरेंसिक विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। सीएम ने पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया और कहा कि पुलिस का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “कानून सबके लिए बराबर है, चाहे कोई भी हो। दोषियों को सजा मिलेगी।” यह आदेश योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी ड्रामा बता रहा है।
SIT जांच से उम्मीद है कि सियाराम हत्याकांड का सच सामने आएगा। पोस्टमॉर्टम और सीसीटीवी फुटेज की जांच होगी, साथ ही गवाहों से पूछताछ की जाएगी। यदि पुलिस की संलिप्तता सिद्ध हुई, तो बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। यह मामला उत्तर प्रदेश में पुलिस सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिरासत में मौत के मामले बढ़ रहे हैं, और पारदर्शी जांच जरूरी है।
सियाराम के परिवार को 10 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। राजनीतिक रूप से, यह घटना 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिए चुनौती बन सकती है। योगी सरकार का दावा है कि कानून व्यवस्था मजबूत है, लेकिन ऐसे मामले उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। कुल मिलाकर, सियाराम हत्याकांड न्याय की मांग को तेज कर रहा है, और SIT की रिपोर्ट से नई बहस छिड़ सकती है।
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