लखनऊ, 8 सितंबर 2025। UP News: उत्तर प्रदेश के 1.68 लाख शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आ रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इन शिक्षकों के मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि की योजना बनाई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने शिक्षामित्रों का वेतन 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये और अनुदेशकों का वेतन 9,000 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा, हर तीन साल में वेतन वृद्धि का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जो इन शिक्षकों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता का वादा करता है।
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इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट में पेश किए जाने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्र और अनुदेशक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। वर्ष 1999 में शुरू हुई शिक्षामित्र योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षक की कमी को पूरा करना था। वर्तमान में 1,43,450 शिक्षामित्र और 25,223 अनुदेशक राज्य के स्कूलों में कार्यरत हैं।
हालांकि, कम मानदेय के कारण इन शिक्षकों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में शिक्षामित्रों को 10,000 रुपये और अनुदेशकों को 9,000 रुपये प्रतिमाह मिलता है, जो न्यूनतम मजदूरी से भी कम है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख दिखाया। एक सपा विधायक के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “समय आने पर सरकार इस बारे में विचार करेगी। जिन्होंने बेहतर कार्य किया है, उन्हें बेहतरीन मानदेय दिया जाएगा।”
इस बयान ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों में नई उम्मीद जगाई है। योगी सरकार ने अन्य राज्यों, जैसे चंडीगढ़, राजस्थान, और बिहार, में शिक्षामित्रों को मिलने वाले वेतन का अध्ययन किया है, जहां मानदेय 20,000 से 51,600 रुपये तक है। इस आधार पर यूपी में भी वेतन को न्यूनतम मजदूरी के समकक्ष 17,000 से 20,000 रुपये करने की योजना है।
इसके अलावा, सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के योगदान को सराहा है। इन शिक्षकों ने न केवल शिक्षा प्रदान की, बल्कि जागरूकता अभियान और सामुदायिक कार्यों में भी हिस्सा लिया। प्रस्ताव के तहत, मानदेय वृद्धि के साथ-साथ नियमित वेतन वृद्धि और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। यह कदम न केवल शिक्षकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण शिक्षा की गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा।हालांकि, शिक्षामित्रों का भविष्य पहले भी अनिश्चितताओं से घिरा रहा है।
2017 में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में नियमित करने के अखिलेश सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था, जिससे उनकी नौकरी पर खतरा मंडराया था। वर्तमान में, योगी सरकार का यह कदम इन शिक्षकों के लिए राहत की किरण लेकर आया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी दांव भी साबित हो सकता है।
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