नई दिल्ली, 14 अगस्त 2025। Independence Day 2025: 15 अगस्त 2025 को भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए अब तक का सबसे लंबा स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया, जो 103 मिनट तक चला। यह भाषण न केवल उनकी 12वीं लगातार स्वतंत्रता दिवस भाषण था, बल्कि इसने 2024 में उनके 98 मिनट के पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।
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इस ऐतिहासिक संबोधन में पीएम मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत, और आर्थिक सुधारों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भारतीय सेना की बहादुरी की जमकर सराहना की, खासकर अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उनकी निर्णायक कार्रवाई के लिए। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने आतंकी ठिकानों और सैन्य लक्ष्यों को नष्ट कर एक मजबूत संदेश दिया है।

पीएम ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “भारत अब परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा। पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवादियों और उनके समर्थकों के बीच कोई भेद नहीं करेगा और अपनी शर्तों पर जवाब देगा। मोदी ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत’ के सपने को दोहराया और देशवासियों से 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने का आह्वान किया।
उन्होंने राष्ट्रीय खेल नीति, अवैध प्रवासियों के खिलाफ मिशन, और 2 करोड़ से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने की उपलब्धि का उल्लेख किया। इसके साथ ही, उन्होंने किसानों, मछुआरों, और पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने अपने 12वें लगातार स्वतंत्रता दिवस संबोधन के साथ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 11 लगातार भाषणों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। केवल जवाहरलाल नेहरू, जिन्होंने 17 बार लगातार लाल किले से संबोधित किया, अब उनसे आगे हैं। पीएम ने अपने भाषण में कांग्रेस पर आपातकाल को लेकर निशाना साधा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सराहना की।
साथ ही, उन्होंने अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर संभावित टैरिफ की चिंताओं को खारिज करते हुए भारत की दृढ़ता को रेखांकित किया। मोदी ने भगवा पगड़ी और तिरंगे स्टोल के साथ पारंपरिक सफेद कुर्ता-चूड़ीदार और भगवा बंदगला जैकेट पहनकर लाल किले पर तिरंगा फहराया। उनके भाषण में स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को श्रद्धांजलि और भविष्य के लिए एक मजबूत दृष्टिकोण शामिल था। यह भाषण न केवल लंबाई के लिए बल्कि अपनी मजबूत और प्रेरक सामग्री के लिए भी याद किया जाएगा।
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