महोबा, 17 दिसंबर 2025। PMFBY Scam: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत करीब 40 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। धोखेबाजों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए न केवल किसानों की जमीन, बल्कि नदी, नाला, चकमार्ग, पहाड़ी क्षेत्र और वन विभाग की भूमि का भी बीमा कराकर सरकारी धन की हेराफेरी की।
इसे भी पढ़ें- Noida Authority Scam: SC ने कसा शिकंजा, पिछले 15 साल के सभी CEO-एस्टीट अफसरों की संपत्ति की होगी जांच
इस साजिश में बीमा कंपनी इफको टोकियो के कर्मचारी, जनसेवा केंद्र (सीएससी) संचालक और कृषि विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। जिलाधिकारी गजल भारद्वाज के निर्देश पर जांच शुरू होने के बाद 27 अगस्त को इफको टोकियो के जिला प्रबंधक निखिल पर मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद निखिल फरार हो गया था, लेकिन 112 दिन बाद पुलिस ने उसे जालौन से गिरफ्तार कर लिया।
बुधवार को निखिल के साथ सीएससी संचालक अरविंद यादव, श्यामलाल सेन और बृजगोपाल अरजरिया को भी पकड़कर जेल भेज दिया गया। अब तक इस मामले में 26 नामजद सहित कई आरोपियों पर केस दर्ज हो चुका है। महिला सहित 23 आरोपी जेल जा चुके हैं, जबकि कृषि विभाग के बीमा पटल सहायक अतुलेंद्र विक्रम सिंह को निलंबित किया जा चुका है।
जिले की विभिन्न थानों में कुल छह मुकदमे दर्ज किए गए हैं। घोटाले की तरीका बेहद चालाकी भरा था। जालसाजों ने चकबंदी प्रक्रिया वाले गांवों को टारगेट किया, जहां पोर्टल पर भू-स्वामी और बटाईदार का डाटा उपलब्ध नहीं होता। 10 रुपये के स्टांप पेपर पर फर्जी बटाईदार बनाकर उन्होंने जमीन का बीमा कराया और क्लेम भी हासिल कर लिया।
हैरानी की बात यह है कि बीमा कंपनी ने बिना किसी सत्यापन के क्लेम का भुगतान कर दिया। जांच में बीमा कर्मियों और कृषि विभाग की संलिप्तता स्पष्ट हुई है। घोटाला सिर्फ महोबा तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार सहित अन्य राज्यों के कुछ लोग भी इसमें शामिल पाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से शिकायत की, जिसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को जांच के निर्देश दिए।
महोबा और हमीरपुर के जिलाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इस बार खरीफ 2025 सीजन में जिले में कुल 2,67,779 बीमा पॉलिसी जारी हुईं, जिनमें 1,41,376 गैर-ऋणी किसान शामिल हैं। सतर्कता के तौर पर बीमा कंपनी ने 46,218 संदिग्ध पॉलिसी वापस कर दीं। इनमें से करीब 2000 किसानों ने सुधार के बाद दोबारा आवेदन किया है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व के अनुसार किसी की पॉलिसी निरस्त नहीं की गई, बल्कि केवल सत्यापन के लिए वापस भेजी गई हैं। यह घोटाला किसानों के हक पर डाका डालने जैसा है और योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। जांच जारी है और और भी खुलासे होने की संभावना है।
इसे भी पढ़ें-UP Flood: यूपी में शुरू हुआ सर्वे का काम, जानें कितने के नुकसान पर मिलेगा मुआवजा








